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छत्तीसगढ़ में मतांतरण रोकने के लिए ग्राम सभाओं के पास होगा अधिकार

मतांतरण को लेकर मा. सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 रायपुर ।छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में अपनी परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया है। मा. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने स्पष्ट किया है कि पेसा (PESA) कानून के तहत ग्राम सभाएं अपने सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे को अक्षुण्ण रखने के लिए स्वतंत्र हैं। इस निर्णय के बाद अब ग्राम पंचायतें अवैध मतांतरण कराने वाले बाहरी तत्वों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने संबंधी निर्णय ले सकेंगी।

क्या था पूरा मामला…?

कांकेर जिले की कई ग्राम पंचायतों ने अपने गांवों के बाहर बोर्ड लगाकर बाहरी धर्म प्रचारकों और मतांतरण कराने वालों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस कदम को मानवाधिकारों और आवाजाही की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने ग्राम सभाओं के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा।

सुप्रीम कोर्ट की मुहर और ‘पेसा’ की ताकत

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए आदिवासी स्वशासन को प्राथमिकता दी है।

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न्यायालय द्वारा ने स्पष्ट निर्देश”

सांस्कृतिक संरक्षण- पेसा कानून ग्राम सभाओं को उनकी विशिष्ट परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों की रक्षा करने का विशेष अधिकार देता है।

ग्राम स्वायत्तता- आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाएं अपनी शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर कड़े निर्णय ले सकती हैं।

संवैधानिक मर्यादा – यह निर्णय संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आदिवासियों को मिलने वाले अधिकारों को और मजबूती प्रदान करता है।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जताई खुशी

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का गर्मजोशी से स्वागत किया है। उन्होंने इसे ‘आदिवासी अस्मिता की जीत’ बताते हुए कहा कि यह फैसला पारंपरिक अधिकारों और ग्राम स्वायत्तता की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा। इससे स्थानीय समुदायों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और बाहरी हस्तक्षेप को रोकने में मदद मिलेगी।यह हमारे लिए खुशी की बात है।

कानून के संबंध में विशेष जानकारी  पेसा एक्ट (पंचायत उपबंध – अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार, 1996) भारत के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए पारंपरिक ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन सुनिश्चित करता है।