हरदा : विश्व बर्थ डिफेक्ट माह के तहत सोमवार को जिला चिकित्सालय हरदा के सभाकक्ष में क्लबफुट कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सिविल सर्जन डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि क्लबफुट एक जन्मजात दोष है, जिसका निवारण संभव है। जिला चिकित्सालय हरदा में प्रति सप्ताह क्लबफुट वाले बच्चों का उपचार प्रारंभ किया जावेगा। जन्म दोष जन्म के समय मौजूद संरचनात्मक परिवर्तन हैं जो हृदय, मस्तिष्क, पैर जैसे शरीर के लगभग किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकते हैं। वे शरीर के दिखने, काम करने के तरीके या दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। क्लबफुट जन्मजात विकृति है, जिससे हर 800 नवजात में से एक बच्चा प्रभावित होता है। हमारे देश में प्रति वर्ष 33,000 बच्चे इस विकृती के साथ पैदा होते हैं।
कार्यशाला में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कपिल पटेल ने बताया कि क्लबफुट जन्म के 9 दोषों में से एक है, जिसे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वारा प्राथमिकता दी गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत क्लब फुट जैसे 42 जन्मजात बीमारी एवं दोषों की स्क्रीनिंग की जाती है ताकि जल्द से जल्द उचित एवं निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा सके। कार्यशाला में उपस्थित आर.एम.ओ. डॉ. राजेश सतीजा ने बताया कि क्लबफुट का यदि सही समय इलाज नहीं कराया जाए तो बच्चा जीवन भर के लिए विकलांग हो सकता है। कार्यशाला में जिला चिकित्सालय की आयुष चिकित्सा अधिकारी डा मंजू वर्मा, डॉ परमानंद छलोत्रे, आडियोलॉजिस्ट नीरज मालवीय सहित नर्सिग ऑफिसर मौजूद रहे।
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