जिले के किसान सरकार की मूंग खरीदी नीति के विरुद्ध हुए लामबंद
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 हरदा ।जिले को मूंग का हब माना जाता है। यहां के किसान औसतन 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ मूंग पैदा करते हैं। लेकिन सरकार की नई खरीदी नीति 2026-27 के तहत वही किसान सिर्फ 1 क्विंटल प्रति एकड़ ही सरकारी MSP 8780 रु पर बेच पाएगा। बाकी 4-5 क्विंटल उसे 4-5 हजार रु कम दाम पर प्राइवेट व्यापारियों को बेचना पड़ेगा।
किसानों का गुस्सा इसी बात पर है। आम किसान यूनियन और भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने कलेक्टर सिद्धार्थ जैन को ज्ञापन सौंपा। उनकी मांग साफ है *”पैदा 5-6 क्विंटल, खरीदी 5 क्विंटल एकड़ होनी चाहिए”*।
आंदोलन का ऐलान
किसानों ने 3 जुलाई तक मांगे न मानने पर चेतावनी दे दी है। 3 जुलाई से गांव-गांव में पुतला दहन और जिला मुख्यालय पर ‘घेर डालो-डेरा डालो’ आंदोलन शुरू होगा। 4 जुलाई से अनिश्चितकालीन मंडी बंद की चेतावनी भी दे दी गई है। किसानों का कहना है “जब तक 100% फसल MSP पर नहीं बिकेगी, हम चैन से नहीं बैठेंगे”।
मध्य प्रदेश मूंग खरीदी नीति 2026-27: अभी के हालात
CM डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट ने 7 जुलाई से MSP खरीदी शुरू करने का ऐलान किया है। नीति के मुख्य पॉइंट:
मप्र के सरकारी आंकड़े
1. MSP दर : मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8780 रु/क्विंटल तय किया गया है।
2. खरीदी अवधि : 7 जुलाई 2026 से 6 अगस्त 2026 तक। किसान 19 जून से 6 जुलाई तक पंजीयन करा सकते हैं।
3. खरीदी केंद्र : पूरे MP में 36 मूंग उत्पादक जिलों में केंद्र खोले जाएंगे। हरदा जिले में 32 की जगह सिर्फ 7 केंद्र ही शुरू किए गए हैं।
4. स्लॉट सिस्टम : हर किसान को ऑनलाइन स्लॉट बुक करना होगा। हरदा में 2 दिन में सिर्फ 600 स्लॉट ही बुक हो पाए।
नीति की खामियां जो किसानों को खल रही हैं
‘प्रति एकड़ 1 क्विंटल’ की सीमा : सरकार ने उत्पादन के आधार पर नहीं, बल्कि एक फिक्स सीमा तय कर दी। जबकि हरदा की उपजाऊ जमीन में 5-6 क्विंटल औसत पैदावार है। ये सीमा लगाने से 80% फसल मंडी से बाहर चली जाएगी।
केंद्र कम, परेशानी ज्यादा
32 की जगह 7 केंद्र खोलने से किसान को 40-50 किमी दूर जाना पड़ रहा है। स्लॉट भी 2 दिन में फुल हो गए। छोटे किसान तो स्लॉट ही नहीं बुक कर पाए।
बीमा राशि का भुगतान लेट खरीफ 2025 की सोयाबीन फसल का बीमा क्लेम अभी तक नहीं मिला। किसान उसी पैसे से मूंग की बुवाई-कटाई कर रहे हैं।
किसान की हालत: कर्ज, लागत और निराशा के बीच
हरदा जिले का किसान इस साल क ई प्रकार से परेशान हो रहा है।
लागत 53% बढ़ी, भाव सिर्फ 12%
पिछले 5 साल में बाजरा-उड़द की लागत 53% बढ़ी है, लेकिन चना की MSP में सिर्फ 12% इजाफा हुआ। डीएपी, कीटनाशक, मजदूरी सब महंगा। 1 एकड़ मूंग लगाने में 15-18 हजार खर्च आ रहा है। 1 क्विंटल MSP पर बेचकर किसान को सिर्फ 8-9 हजार मिलेंगे। यानी लागत भी पूरी नहीं होगी।
4 जुलाई से अगर मंडी बंद हुई तो
अगर किसान आंदोलन करेगें तो 4 जुलाई से मंडी बंद हो गई तो फसल कटने के बाद किसान के पास स्टोरेज की जगह नहीं। मजबूरन उसे सस्ते में व्यापारियों को बेचनी पड़ेगी। इससे साल भर का कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाएगा।
अजब सी उलझन है क्या करे
एक तरफ खेत में मूंग तैयार खड़ी है, दूसरी तरफ सरकार की नीति समझ नहीं आ रही। “पैदा हम 6 क्विंटल करें और सरकार 1 क्विंटल खरीदे, बाकी हम क्या करें? फेंक दें?” – ये सवाल हरदा के हर किसान के चेहरे पर है। युवा किसान नेता कह रहे हैं “अगर MSP पर फसल नहीं बिकेगी तो खेती छोड़कर मजदूरी करनी पड़ेगी”। हरदा के गांवों से युवा तेजी से शहर की तरफ जा रहे हैं।सरकार कहती आ रही खेती लाभ का धंधा बन रही है यहां किसान कर्ज में दबा जा रहा है।
नीति बने किसानों के लिए, किसानों के खिलाफ नहीं
हरदा की ये खबर सिर्फ एक जिले की नहीं, पूरे MP की किसान पीड़ा है। सरकार की मंशा किसानों को MSP का लाभ देने की है, लेकिन ‘1 क्विंटल प्रति एकड़’ की टेक्निकल सीमा ने पूरी योजना पर पानी फेर दिया है।
किसान मांग कर रहे हैं – या तो खरीदी सीमा 5 क्विंटल एकड़ करो, या फिर 100% फसल खरीदी की गारंटी दो। वरना 3 जुलाई के बाद हरदा की मंडियां खाली और सड़कें किसानों से भरी होंगी।
अब क्या संभावनाएं है…?
अब गेंद सरकार के पाले में है। क्या वो किसानों की बात सुनेगी या फिर हरदा से शुरू हुआ आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलेगा…?
ये अब आने वाले 48 घंटे तय करेंगे।

