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मध्य प्रदेश में विकास या विनाश? हाइवे के नाम पर लाखों पेड़ कटे, पुनर्रोपण नहीं, अब प्रकृति का कहर

इधर विकास की सड़कें, उधर कटते हरे भरे जंगल

( संपादक की कलम)

मकडा़ई एक्सप्रेस 24 भोपाल ।मध्य प्रदेश में बीते 5 सालों में हजारों किलोमीटर नए नेशनल और स्टेट हाइवे बने हैं। सड़क कनेक्टिविटी बेहतर हुई, सफर आसान हुआ। लेकिन इस विकास की कीमत प्रदेश के जंगलों ने चुकाई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ हाइवे निर्माण के लिए राज्य में 8 लाख से ज्यादा पेड़ काटे गए। पर्यावरणविदों का आरोप है कि जिन पेड़ों को काटा गया, उनके बदले उतने पेड़ लगाए ही नहीं गए।

कागजों पर पौधरोपण, जमीन पर सूखा

वन विभाग का नियम है कि एक पेड़ काटने पर 10 पौधे लगाने होंगे। हाइवे प्रोजेक्ट में भी NHAI और MPRDC को “प्रतिपूरक वनीकरण” करना था। लेकिन RTI से मिली जानकारी बताती है कि 2021 से 2025 के बीच जितने पेड़ काटे गए, उसका सिर्फ 22% ही नया पौधरोपण हो पाया। कई जगह लगाए गए पौधे भी पानी और देखभाल के अभाव में सूख गए। इंदौर-खंडवा, भोपाल-जबलपुर, रीवा-सतना हाइवे के किनारे अब सिर्फ धूप और धूल है।

प्रकृति दे रही जवाब: रिकॉर्ड गर्मी और गिरता भूजल

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पेड़ों के कटने का असर अब दिखने लगा है। इस साल MP में अप्रैल-मई में पारा 48°C तक पहुंचा। भोपाल, ग्वालियर, खजुराहो में 20 साल का गर्मी का रिकॉर्ड टूटा।

बड़े पेड़ कटने से भूजल रिचार्ज भी रुक गया। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट कहती है कि हाइवे के 5 किमी दायरे के 60% गांवों में भूजल स्तर 3 से 8 मीटर तक नीचे चला गया है। बुंदेलखंड और मालवा के कई इलाकों में मई में ही हैंडपंप सूख गए। किसान बोले – _”सड़क तो बन गई, पर अब खेत में पानी नहीं बचा”_।

विशेषज्ञों की चेतावनी: “विनाश की नई तस्वीर”

पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. आर. के. वर्मा कहते हैं, _”पुराने पीपल, नीम, बरगद के पेड़ काटना सिर्फ लकड़ी काटना नहीं है। एक 50 साल का पेड़ साल में 2 लाख लीटर पानी जमीन में उतारता है और 15 AC जितनी ठंडक देता है। हम विकास के नाम पर विनाश की नई तस्वीर खड़ी कर रहे हैं”_।

सरकार का पक्ष और आगे की राह

MPRDC का कहना है कि पौधरोपण का काम चल रहा है और 2027 तक लक्ष्य पूरा कर लेंगे। CM मोहन यादव ने पिछले हफ्ते कहा था कि _”विकास और पर्यावरण में संतुलन जरूरी है”_।

लेकिन जमीन पर हालात अलग हैं। भीषण गर्मी के बाद अब प्रदेश मानसून का इंतजार कर रहा है। पर सवाल वही है – क्या बिना पेड़ों के धरती पानी रोक पाएगी? हाइवे तो बन गए, पर क्या हमने बदले में सूखा और गर्मी मोल ले ली….?