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यहाँ ईरान-अमेरिका युद्ध और भारत की रणनीति पर ताजा अपडेट

ईरान जंग: “हम पाकिस्तान की तरह ‘दलाल’ देश नहीं”, सर्वदलीय बैठक में बोले एस जयशंकर

मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर बुधवार, 25 मार्च 2026 को भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत, पाकिस्तान की तरह किसी ‘दलाल’ (Broker) की भूमिका नहीं निभाएगा और न ही हम किसी के लिए मध्यस्थता (Mediation) करते हैं।

विपक्ष के सवालों पर सरकार का कड़ा रुख

बैठक के दौरान कांग्रेस नेता तारिक अनवर समेत विपक्ष के कई नेताओं ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप था कि जहां पाकिस्तान इस युद्ध में मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत केवल एक ‘मूकदर्शक’ बना हुआ है।

विपक्ष के सवाल एस जयशंकर का जबाब

विपक्ष के सवाल पर जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा

“भारत कोई बिचौलिया देश नहीं है। पाकिस्तान 1981 से ही इस तरह की ‘दलाली’ करता आ रहा है, इसमें कुछ भी नया नहीं है। हम अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हैं, न कि दूसरों के बीच सौदेबाजी को।”

उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए याद दिलाया कि पाकिस्तान पहले भी अमेरिका और चीन (1971) और अमेरिका-ईरान (1981) के बीच इसी तरह की भूमिका निभाता रहा है।

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ऊर्जा सुरक्षा और चार जहाजों की सुरक्षा

बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इसमें मुख्य चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर थी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने बताया कि सरकार ने पेट्रोलियम आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पहले ही चार जहाजों को सुरक्षित (Secure) कर लिया है।

भारत के पास पर्याप्त तेल गैस

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आश्वासन दिया कि भारत के पास पर्याप्त तेल और गैस का भंडार है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से स्पष्ट रूप से कहा है कि यह युद्ध जल्द समाप्त होना चाहिए।

विपक्ष ने जताई असहमति

सरकार के जवाबों के बावजूद विपक्षी दल पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आए। तारिक अनवर और धर्मेंद्र यादव जैसे नेताओं ने इसे ‘असंतोषजनक’ बताते हुए मांग की कि इस संवेदनशील मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। गौरतलब है कि इस महत्वपूर्ण बैठक में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए।

पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता की मेजबानी करने की इच्छा जताई। उनके इस प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर साझा भी किया था, जिसे विपक्ष भारत की राजनयिक विफलता के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा था।

(यह रिपोर्ट 26 मार्च 2026 तक की ताजा जानकारियों पर आधारित है।)