UN में नेपाल के PM ने भारत-चीन को कहा थैंक्यू, बोले- हिमालय बचाने के लिए साथ आना होगा
_पीएम बालेन शाह का पहला UN संबोधन, भोटेकोशी त्रासदी को बताया पूरी दुनिया के लिए चेतावनी दी कि ग्लोबल वार्मिंग से परमाफ्रॉस्ट पिघल रहा है, जिससे पहाड़ों में दरारें, भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है_
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 दिल्ली । नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में दुनिया को जलवायु परिवर्तन पर बड़ी चेतावनी दी। उन्होंने अपने पहले संबोधन में कहा कि भोटेकोशी-त्रिशूली में आई बाढ़ सिर्फ नेपाल की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक अलार्म है।
पीएम शाह ने कहा, “भोटेकोशी त्रासदी सिर्फ लोकल हादसा नहीं थी, यह दुनिया को दी गई चेतावनी थी। सवाल है कि क्या हमने वह चेतावनी सुनी? नेपाल के लिए यह मानवीय घटना नहीं, बल्कि विकास पर आपातकाल है।”
भारत और चीन की मदद के लिए आभार
प्रधानमंत्री ने बाढ़ के बाद नेपाल की मदद करने वाले देशों का आभार जताया। उन्होंने विशेष रूप से भारत और चीन का नाम लेते हुए कहा कि दोनों पड़ोसी देशों ने तुरंत और उदारता से सहायता भेजी। उन्होंने UN, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और अन्य एजेंसियों को भी धन्यवाद कहा।
हिमालय के लिए नया प्रस्ताव
हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म
नेपाल के पीएम ने एक बड़े प्रस्ताव का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र करीब 2 अरब लोगों को पानी, खेती और जीवन देता है। यह धरती के लाइफ-सपोर्ट सिस्टम का हिस्सा है, हाशिए पर नहीं।
उन्होंने प्रस्ताव दिया कि नेपाल, भारत और चीन की अगुवाई में एक हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म बनाया जाए।
उन्होंने कहा, “इस मैकेनिज्म के जरिए हम सैटेलाइट डेटा और विशेषज्ञता साझा करें। खतरनाक ग्लेशियल झीलों की निगरानी करें। संयुक्त अर्ली-वार्निंग सिस्टम को मजबूत करें और आपदा आने पर सीमा पार मिलकर मदद करें। हिमालय को बिखरी हुई जानकारी का मोर्चा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रयोगशाला बनना चाहिए।”
पीएम शाह ने चेतावनी दी कि ग्लोबल वार्मिंग से परमाफ्रॉस्ट पिघल रहा है, जिससे पहाड़ों में दरारें, भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है।

