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ट्रंप की मेक इन अमेरिका नीति से मेक इन इंडिया’ को कोई बड़ा खतरा नहीं

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से अपनी संरक्षणवादी नीतियों को आक्रामक रूप से लागू कर मेक इन अमेरिका को वैश्विक व्यापार युद्ध का हथियार बना दिया है। भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने के साथ-साथ रूस से तेल खरीद को लेकर दबाव बनाना नीति का हिस्सा है।
ट्रंप का दावा है कि मेक इन अमेरिका केवल एक आर्थिक योजना नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। वे चाहते हैं कि चिप्स से लेकर जहाजों तक सब अमेरिका में बने। इसके लिए उन्होंने सभी देशों पर न्यूनतम 10 प्रतिशत आयात शुल्क लागू करने की घोषणा की है। ट्रंप का कहना है कि इससे अमेरिकी नौकरियों में वृद्धि होगी और औद्योगिक आधार मजबूत होगा।
हालांकि, भारत ने इस नीति की तीखी आलोचना कर कहा है कि व्यापार और विदेश नीति को मिलाकर ट्रंप विश्व मंच पर दबाव की राजनीति कर रहे हैं। रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए आरोपों को भारत ने खारिज कर स्पष्ट किया है कि यह निर्णय उपभोक्ताओं की जरूरतों के मुताबिक और वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के हित में लिया गया है।
बाजार जानकारों का मानना है कि ट्रंप की नीतियों से अमेरिका को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है। उच्च श्रम लागत और उत्पादन खर्च के कारण अमेरिका में सस्ते उत्पादों का निर्माण संभव नहीं है। भारत जैसे देशों में सस्ता श्रम, कम लागत और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता ने उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। पूर्व वाणिज्य सचिव का कहना है कि ट्रंप की टैरिफ नीति ‘मेक इन इंडिया’ को कोई बड़ा खतरा नहीं है, क्योंकि अमेरिका की लागत संरचना वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग के लिए उपयुक्त नहीं है।