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मंडला: बैगा आदिवासी मजदूर परिवार को आया 11.44 लाख का बिजली बिल, बिजली विभाग बोला – ‘मिस्टेक हो गई’

मकडा़ई एक्सप्रेस 24 मंडला, मध्य प्रदेश । बिजली बिल की गलत एंट्री अब गरीब परिवारों के लिए सिरदर्द बन रही है। मंडला जिले के एक बैगा आदिवासी मजदूर परिवार को बिजली विभाग ने 11 लाख 44 हजार 680 रुपये का बिल थमा दिया। रोज मेहनत-मजदूरी कर दो वक्त की रोटी जुटाने वाले परिवार के होश उड़ गए।

क्या है पूरा मामला

मंडला के बैगा आदिवासी समुदाय से जुड़े एक मजदूर परिवार को बिजली विभाग का बिल मिला। बिल में कुल राशि 11,44,680 रुपये लिखी थी। परिवार में न तो एसी है, न गीजर, न कोई बड़ा उपकरण। घर में एक-दो बल्ब और पंखा ही चलते हैं। मजदूरी से महीने का 6-7 हजार कमाने वाले परिवार के लिए ये रकम कल्पना से परे थी।

बिल हाथ में आते ही परिवार के सदस्य घबरा गए। बैगा समुदाय पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर माना जाता है। 11 लाख का बिल देखकर परिवार ने तुरंत बिजली ऑफिस के चक्कर लगाने शुरू कर दिए।

विभाग ने मानी गलती

मामला सामने आने के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों ने जांच की बात कही। प्रारंभिक जांच में बिल में ‘मीटर रीडिंग या एंट्री की त्रुटि’ की आशंका जताई गई है। विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि सिस्टम में गलत फीडिंग या मीटर का गलत कोड डालने से ऐसा बिल जनरेट हो सकता है।

अधिकारियों ने परिवार को आश्वासन दिया कि बिल ठीक करके नया बिल जारी किया जाएगा। तब तक परिवार को कोई वसूली का दबाव नहीं झेलना पड़ेगा।

बार-बार हो रही ऐसी गलतियां

ये कोई पहला मामला नहीं है। एमपी समेत कई राज्यों में पहले भी बिजली बिल में 2 लाख, 5 लाख, 50 लाख तक की गलत रकम आ चुकी है। ज्यादातर केस में कारण वही निकलता है – मैनुअल एंट्री की गलती, मीटर न पढ़ने पर औसत बिल, या सिस्टम एरर।

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बैगा परिवार जैसे गरीब उपभोक्ताओं के लिए ऐसी गलती सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, मानसिक तनाव बन जाती है। बिल सुधारने के लिए गरीब आदमी को बार-बार ऑफिस के चक्कर काटने पड़ते हैं।

क्या करें अगर गलत बिल आए

1. तुरंत नजदीकी बिजली ऑफिस जाकर शिकायत दर्ज कराएं

2. पिछले 6 महीने के बिल और मीटर की फोटो रखें

3. 1912 उपभोक्ता हेल्पलाइन पर कॉल करें

4. उपभोक्ता फोरम में भी शिकायत कर सकते हैं

बिजली कंपनी का नियम है कि मीटर रीडिंग में गलती साबित होने पर उपभोक्ता को अतिरिक्त राशि नहीं देनी पड़ती। लेकिन तब तक मानसिक परेशानी तो झेलनी ही पड़ती है।

यक्ष प्रश्न क्या ऐसी गलती किसी परिवार को सदमा नही देगी…?

मंडला के इस बैगा परिवार का बिल अब ठीक किया जा रहा है। सवाल ये है कि सिस्टम कब तक ऐसी ‘मिस्टेक’ को आदिवासी मजदूरों की जेब और दिमाग पर भारी करता रहेगा…..?