देवास। ए ग्रेड कृषि उपज मंडी में इन दिनों भावांतर योजना के तहत सोयाबीन बेचने के लिए किसानों की बड़ी भीड़ उमड़ रही है, लेकिन मंडी परिसर में पहुंचते ही किसान अव्यवस्थाओं से जूझने को मजबूर हैं। तौल से लेकर बैठने, पेयजल और साफ-सफाई तक कई बुनियादी व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। किसानों की इन्हीं समस्याओं को जानने सोमवार को भारतीय किसान संघ का एक दल मंडी पहुंचा। निरीक्षण के दौरान कई खामियां सामने आर्इं, जिन पर संघ ने कड़ी नाराजगी जताई है।
निरीक्षण में पाया गया कि अनाज तुलाई के समय कई फर्मों पर तुलावटी मौके पर मौजूद ही नहीं थे। जिला मंत्री शेखर पटेल ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि तुलावटी के बिना तौल कैसे हो रहा है और किसानों का माल सही तौला जा रहा है या नहीं, इसकी निगरानी कौन कर रहा है। नियमों के अनुसार तौल स्थल पर तुलावटी की उपस्थिति अनिवार्य है, लेकिन मंडी में इसका खुला उल्लंघन देखा गया। इतना ही नहीं, कुछ फर्मों पर इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे की जांच के लिए आवश्यक मानक बाट भी उपलब्ध नहीं थे। इससे तौल की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। किसान आशंका जता रहे हैं कि कहीं उन्हें तौल में नुकसान तो नहीं उठाना पड़ रहा।
किसानों के शेड पर व्यापारियों का कब्जा : भारतीय किसान संघ के दल ने प्रांगण क्र. 2 में बने बड़े शेड के नीचे व्यापारियों द्वारा अनाज के बोरे रखकर एवं भारी वाहनों को पार्क कर स्थायी रूप से कब्जा किए जाने पर भी आपत्ति जताई। जिला मंत्री शेखर पटेल ने कहा कि शेड किसानों की सुविधा के लिए बनाए गए थे, ताकि उनका माल बारिश से बच सके, लेकिन अब यहां व्यापारी अपना माल जमाकर बैठे हैं, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है।
पेयजल और सफाई बदहाल : निरीक्षण के दौरान पेयजल टंकियों के आसपास गंदा पानी जमा रहने की शिकायत भी सामने आई। इससे बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। वहीं गार्डन, जहां किसान बैठकर भोजन करते हैं, वहां भी सफाई का अभाव दिखा। शेखर पटेल ने कहा कि मंडी की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। वाहनों की आवाजाही के दौरान पूरे परिसर में धूल उड़ती रहती है, जिससे किसानों और मजदूरों को सांस लेने में भी दिक्कत होती है।

