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मध्यप्रदेश में 2 हजार से ज्यादा सैंपल फेल, 60% डेयरी प्रोडक्ट मिलावटी

भोपाल। मध्य प्रदेश में दूध, मावा, पनीर, घी, मिर्च, धनिया पाउडर समेत कई चीजों में मिलावट हो रही है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में यह खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि करीब 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए है। करीब 30 जिलों में दो हजार सैंपल फेल हुए। इनमें ग्वालियर नंबर वन पर है। आइए जानते है कहां कौन से सैंपल फेल हुए है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मोबाइल वैन के जरिए लिए गए सैंपल की तीन साल की रिपोर्ट सामने आई है। मोबाइल वैन के संचालन से लेकर अब तक करीब एक लाख सैंपल लेने का दावा किया गया है। जिसमें रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट ही सबसे ज्यादा मिलावटी पाए गए है। मिठाइयों के साथ मसाले और तेल भी सुरक्षित नहीं है। जलेबी, लड्डू, बर्फी गजक और नमकीन में मिलावट मिली। लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल हो गए।

फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की हाल में एक रिपोर्ट सामने आई। जिसमें 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए। सबसे ज्यादा मामले करीब 420 ग्वालियर से सामने आए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट ही सबसे ज्यादा मिलावटी पाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिलावट केवल फूड पॉइजनिंग ही नहीं, बल्कि डायबिटीज, हार्ट डिजीज और हार्मोनल बीमारियों तक का कारण बन रही है।

FDA की यह रिपोर्ट मोबाइल वैन के जरिए लिए गए सैंपल और उनकी टेस्ट रिजल्ट के आधार पर तैयार की गई है। जिसमें बीते तीन साल के आंकड़े शामिल हैं। यह पहली बार है जब मोबाइल वैन के संचालन से लेकर अब कर लिए गए एक लाख सैंपल की कंपाइल रिपोर्ट सामने आई है।

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ग्वालियर सबसे आगे, कई जिलों में फैला मिलावट का जाल राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ग्वालियर जिले में सबसे ज्यादा मिलावट के मामले सामने आए हैं, जहां करीब 420 सैंपल फेल पाए गए। इसके बाद गुना (110), उज्जैन (95), भिंड (90) और बुरहानपुर (75) जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अलावा शाजापुर, इंदौर, धार, रीवा, सागर, सीहोर और नरसिंहपुर सहित 30 से अधिक जिलों में मिलावट का जाल फैला हुआ है। जांच में दूध, पनीर, मावा, मिठाइयों और मसालों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है।

मिलावट से शरीर को कैसे हो रहा नुकसान
गांधी मेडिकल कॉलेज के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा बताते हैं कि मिलावटी भोजन में मौजूद एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स (जैसे माइक्रोप्लास्टिक, हेवी मेटल) शरीर में जाकर हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इससे गट हेल्थ खराब होती है। बॉडी में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया नष्ट होते हैं। शरीर में पोषण की कमी होती है। इसके साथ ही मोटापा, डायबिटीज और पीसीओडी जैसी बीमारियां बढ़ती हैं।

मसाले और तेल भी नहीं सुरक्षित
सिर्फ डेयरी ही नहीं, मसाले और खाद्य तेल भी मिलावट से अछूते नहीं हैं। लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इनका लगातार सेवन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है और लंबे समय में कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकता है।

जलेबी, लड्डू, बर्फी, गजक और नमकीन जैसे खाद्य पदार्थों में भी बड़े पैमाने पर मिलावट सामने आई है। त्योहारों के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है। दमोह, भिंड और मुरैना जैसे जिलों में मिठाइयों के सैंपल बड़ी संख्या में फेल पाए गए हैं।

लगातार चल रही मॉनिटरिंग
FDA आयुक्त दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि फेल सैंपलों के आधार पर संबंधित दुकानदारों और निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की लगातार की जा रही है। निगरानी सख्त की गई है। मिलावट का यह नेटवर्क खत्म करने के लिए नई योजना के तहत प्रदेश में काम किया जा रहा है। मोबाइल वैन प्रदेशभर में घूमकर सैंपल एकत्र कर उनकी टेस्टिंग कर रही हैं।