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Big News Mp: निजी स्कूल में बुक प्रकाशकों ने लाखों से करोड़ तक कमीशन पहुंचाया

मामला विशेष दुकानों से शिक्षण सामग्री खरीदने की शिकायत का मामला –

शिक्षा के मंदिर बन रहे लूट का साधन अभिभावकों की जेब पर शिक्षा के नाम से डाला जा डाका। अपनी पसंद की दुकान से शिक्षण सामग्री खरीदने का दबाब बनाया जाता है ताकि उससे उन्हे मोटा कमीशन मिल सकें यही मोनीपाली प्रदेश की स्कूलों में चरम सीमा पर है। वही शिक्षा विभाग द्वारा कार्यवाही न किए जाना यह बताता है कि यह कहीं उनकी रजामंदी से तो नही हो रहा हैं। अब लगातार शिकायते मिलने के बाद से सीएम ने इस पर कड़ा विरोध जताया हैं और सभी जिला कलेक्टर को इस मामलें निगाहे बनाए रखने को भी कहा हैं जिला शिक्षाधिकारी द्वारा शिकायत मिलने पर कार्यवाही की जायेगी।

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 म.प्र.। पूरे प्रदेश में निजी स्कूलों में कमीशन खोरी बेहताशा चल रही है जो सीधे अभिभावको की जेब को काट रही थी। अप्रेल माह में नवीन सत्र प्रारंभ करने का सीधा सा उद्देश्य स्कूल प्रबंधन द्वारा अपनी पसंद की दुकान पर स्कूल में चलने वाली किताबे, यूनिफार्म, डायरी, बेल्ट बैज बैग शूज मोजे आदि सामग्री उपलब्ध कराना जिसका सीधा कमीशन स्कूल प्रबंधन को दुकानदार या बुक प्रकाशक के माध्यम से जाता है।

कमीशन लाख रुपये से लेकर 02 करोड़ तक –

अगर बात सिर्फ जबलपुर की करे तो यह कमीशन 2 से 10 लाख तक जा पहुंचा था। मोनीपोली यह भी कि एक स्कूल का सामान एक ही दुकान पर एक दुकान पर दो से तीन स्कूलों की शिक्षण सामग्री उपलब्ध थी। प्रीप्रायमरी से हायरसेकेंडरी तक किताबों प प्रकाशक बुक डिपों संचालकों के माध्यम से करोडो रुपये कमीशन तक पहुचाया गया है। बुक डिपो प्रकाशको से स्कूलों ने कमीशन की राशि नकद मांगी थी। इस कारण हवाला के जरिए पैसे पहुंचाने का काम किया गया। स्कूलों को हवाला का काम करने वालों ने कमीशन के तौर पर 10 लाख रुपये से लेकर दो करोड़ तक नकद पहुंचाए। सूत्राें की माने तो यह जानकारी सामने आने के बाद आयकर विभाग की इंवेस्टिगेशन विंग सक्रिय हो गई है।

स्कूलों पर आयकर विभाग का शिकंजा –

जिला प्रशासन और जीएसटी द्वारा शहर के बुक डिपो और यहां से मिले प्रकाशकों की जानकारी खंगाली गई। इस दौरान प्रकाशकों ने अपनी महंगी किताब, केजी वन से 12 वीं के कोर्स में जुड़वाने के लिए यह कमीशन दिया। कई मिशनरी स्कूल के संचालक और प्रबंधक , दोनों को चार पहिया लग्जरी वाहन भी पहुंचाए गए हैं, जिसके बाद मिशनरी से लेकर शहर के 10 बड़े स्कूलों की बुक प्रकाशक और बुक डिपो संचालक की सांठगांठ सामने आ गई है। जल्द ही इन स्कूलों पर आयकर विभाग का शिकंजा कस सकता है।

जबलपुर के मिशनरी स्कूलों में लगभग 8 हजार से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। एक बच्चे से औसत तीन हजार तक फीस हर माह ली जाती है। इनसे साल भर में सिर्फ फीस के दौर पर लगभग 29 करोड़ रुपये आते हैं। इसके अलावा हर स्कूल में कक्षा के मुताबिक अलग-अलग बुक-कापी, सप्ताह में तीन यूनिफार्म, सूज, बैग पर एक बच्चे पर 12 से 15 हजार रुपये तक खर्च होते हैं। इन्हें बिकवाने में स्कूलों को मोटा कमीशन मिलता है।

प्रशासन को शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई –

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अभिभावकों ने पनागर के सेंट अलायसियस स्कूल की शिकायत जिला प्रशासन से की है। शिकायत में कहा है कि स्कूल प्रबंधक द्वारा हर साल नई किताबें जोड़ी जा रही हैं। कई कक्षाओं में एनसीआरटी भी नहीं लगाई जा रहीं। ऐसी किताबों को जोड़ा जा रहा है, जो खास बुक डिपो में ही मिल रही है।  कक्षा दूसरी के बच्चों की फीस ज्यादा कर दी गई है। वहीं उनकी किताब, सप्ताह में तीन बार लगने वाली तीन यूनिफार्म, कापी, स्कूल, बैग, सूज भी खास दुकान से लेने का दबाव बनाया जा रहा है।  पनागर में  कई स्कूल हैं, जहां लगातार अभिभावकों की शिकायत आ रही है!

स्कूलों को कमीशन की राशि हवाला के जरिए पहुंचाने की जानकारी है, हम सभी पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं। सभी पक्षाें को सुनने के बाद ही कार्रवाई होगी। – दीपक सक्सेना, कलेक्टर जबलपुर

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