मकडा़ई एक्सप्रेस 24 पन्ना ।जिले में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया है। गुनौर में तैनात रहे तत्कालीन नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला और उनके मददगार चौकीदार देवीदयाल दहायत को 25 हजार की रिश्वत लेने के मामले में 5-5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही दोनों पर जुर्माना भी लगाया गया है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला साल 2020 का है। सिली गांव के ब्रजबिहारी प्रजापति अपने खेत से ईंट बनाने वाली मिट्टी ट्रैक्टर में भरकर ले जा रहे थे। तभी तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार रविशंकर शुक्ला ने उनका ट्रैक्टर पकड़कर थाने में खड़ा करवा दिया। ट्रैक्टर छोड़ने के बदले 35,000 रुपये की रिश्वत मांगी गई।
पीड़ित ने सागर लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की। बातचीत के बाद 35,000 रुपये देना तय हुआ। 10,000 रुपये पहले ही दे दिए गए। बाकी बचे 25,000 रुपये जब पीड़ित सरकारी आवास पर देने पहुंचा, तो नायब तहसीलदार ने वो पैसे अपने पास खड़े चौकीदार देवीदयाल को पकड़ाने को कहा।
लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ा
जैसे ही पैसे का लेन-देन हुआ, लोकायुक्त की टीम ने छापा मारकर दोनों को रंगे हाथों दबोच लिया। मौके से रिश्वत के नोट बरामद किए गए।
कोर्ट का सख्त रुख
पन्ना के अपर सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को इस मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर रिश्वत लेना गंभीर अपराध है। इससे आम लोगों का प्रशासन से विश्वास डगमगाता है। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 5-5 साल की कठोर जेल और जुर्माने की सजा दी।
भ्रष्टाचार पर लगाम
यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी नजीर माना जा रहा है। लोकायुक्त की कार्रवाई और कोर्ट की सख्ती से साफ है कि रिश्वतखोरी पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। सरकारी काम के लिए रिश्वत मांगना अब भारी पड़ रहा है।

