jhankar
ब्रेकिंग
हंडिया थाने में जन्माष्टमी का अनूठा दृश्य, बंदीगृह में मनाई श्री कृष्ण जन्माष्टमी  हरदा विधायक डॉ. दोगने की पहल रंग लाई, केंद्रीय मंत्री गडकरी ने फोरलेन सड़क प्रस्ताव पर कार्यवाही के ... MPPSC में सफलता के बाद सावन बांके बने वन परिक्षेत्र अधिकारी, गुर्जर परिवार ने किया स्वागत-अभिनंदन बिजली चोरी के खिलाफ हरदा जिले में सघन चेकिंग अभियान तक्षशिला विद्या मंदिर में धूमधाम से मनाई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी अधिवक्ता संघ मेरा परिवार है, सहयोग के लिए हमेशा रहूंगी उपलब्ध न्यायाधीश तबस्सुम खान जानिए आज कैसा रहेगा MP का मौसम आज भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: देशभर में धूमधाम से मन रही है जन्माष्टमी, मंदिरों में गूंज रहे हैं नंद... आज का राशिफल: 4 सितंबर 2026 🌟 जानिए आज क्या कहते है आपके भाग्य के सितारे हरदा में जमीन विवाद को लेकर बवाल, दोनों पक्ष आमने-सामने एक पक्ष की शिकायत पर 8 लोगों के खिलाफ FIR

अस्पताल में डॉक्टर-नर्स से मारपीट पर अब कड़ी कार्रवाई, 3 महीने जेल और 10 हजार तक जुर्माने का प्रावधान सुरक्षा सख्त, 2008 के एक्ट के तहत होगी सीधी एफआईआर

मकडा़ई एक्सप्रेस 24 भोपाल। अस्पतालों में ड्यूटी के दौरान डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मारपीट, धमकी या अभद्र व्यवहार अब सीधे अपराध की श्रेणी में आएगा। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने 10 अगस्त को सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।

अब अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों से मारपीट करने वालों पर “चिकित्सा सेवा कर्मी और चिकित्सा संस्थान अधिनियम 2008” के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर 3 महीने तक जेल या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

6 घंटे के अंदर दर्ज होगी एफआईआर, रात में बढ़ेगी सुरक्षा

नए निर्देशों के अनुसार अस्पताल प्रबंधन को घटना की जानकारी मिलते ही 6 घंटे के भीतर पुलिस में एफआईआर दर्ज करानी होगी। मारपीट के बाद मरीज का इलाज जारी रखने की जिम्मेदारी भी अस्पताल प्रशासन की होगी।

- Install Android App -

रात के समय सुरक्षा बढ़ाने के लिए अस्पतालों में पेट्रोलिंग और ड्यूटी पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सीसीटीवी कैमरों के ब्लाइंड स्पॉट खत्म कर नाइट विजन और हाई डेफिनेशन कैमरे लगाने होंगे।

भीड़ नियंत्रण के लिए नए नियम, बनेगा आंतरिक शिकायत तंत्र

अस्पतालों में विवाद और भीड़ की स्थिति को रोकने के लिए अब हर मरीज के साथ सिर्फ 1-2 परिजनों को ही प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए विजिटर पास भी जारी किए जाएंगे।

कर्मचारियों की शिकायतों के निपटारे के लिए हर अस्पताल में “आंतरिक शिकायत समिति” बनानी होगी। इस समिति में 50% महिला सदस्य और एक बाहरी सामाजिक संगठन की सदस्य को भी शामिल करना अनिवार्य होगा। अस्पतालों को स्थानीय पुलिस से भी समन्वय रखने के निर्देश दिए गए हैं।