हंडिया।भक्ति, ऊर्जा और उत्साह का ऐसा संगम कम ही देखने को मिलता है। सोमवार सुबह जैसे ही शारदीय नवरात्रि का शुभ मुहूर्त आया, हंडिया की गलियों ने मानो नया जीवन पा लिया। शंखनाद और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच सजे-धजे पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं आस्थावानों की भीड़ के बीच विराजमान हुईं। नगर का हर रास्ता रोशनी और रंगों से सजा, तो हर आंगन में कलश स्थापना के साथ पूजा-अर्चना की सुगंध फैल गई।
पुराना बस स्टैंड स्थित शंकर मंदिर से लेकर पुराना थाना ग्राउंड तक, नवदुर्गा उत्सव समिति ने पारंपरिक रीति और आधुनिक सजावट का ऐसा मिश्रण प्रस्तुत किया कि श्रद्धालु देर तक निहारते रह गए। समिति सदस्य प्रहलाद सिंह खत्री ने बताया कि आश्विन मास की प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाले इस महापर्व में मां दुर्गा के नौ अद्भुत स्वरूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—की विशेष उपासना की जाएगी।
भक्तों की आराधना, बच्चों की उमंग और युवाओं की सेवाभाव ने हंडिया को देवी भक्ति के ऐसे उत्सव में बदल दिया है, जहां सिर्फ पूजा ही नहीं, बल्कि संस्कृति, कला और सामूहिक आस्था का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है।

