हरदा। सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच भी यदि हौसले बुलंद हों, तो सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। हरदा जिले के नयापुरा गांव के युवा शिक्षाविद सुजान सिंह पाल, जिन्होंने वर्ष 2014 में एक किराए के छोटे से कमरे से आकाश गंगा स्कूल की शुरुआत की थी। आज यह स्कूल नर्सरी से आठवीं कक्षा तक संचालित हो रहा है, जहां करीब 250 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
सुजान सिंह पाल का बचपन बेहद संघर्षों में बीता। दो भाइयों और एक बहन वाले परिवार का पालन-पोषण उनके माता-पिता ने मजदूरी करके किया। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से प्राप्त की, जबकि आगे की पढ़ाई हंडिया ओर अन्य जगह हॉस्टल में रहकर पूरी की।
गरीबी को करीब से देखने के बाद उनके मन में यह संकल्प पैदा हुआ कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जाए और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलें। इसी सोच के साथ उन्होंने छोटे स्तर पर स्कूल की शुरुआत की, जो आज क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में अपनी पहचान बना चुका है।
स्कूल का स्वयं का भवन बनाने के लिए उन्होंने समूह से ऋण लिया और मित्रों से भी आर्थिक सहयोग प्राप्त किया। संघर्षों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शिक्षा की इस मुहिम को आगे बढ़ाया।
सुजान सिंह पाल बताते हैं कि वे गरीब परिवारों की स्थिति को अच्छी तरह समझते हैं, इसलिए मात्र 5 हजार रुपये वार्षिक शुल्क में बच्चों को निजी स्कूल जैसी सुविधाओं के साथ शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। स्कूल में मध्यप्रदेश बोर्ड के पाठ्यक्रम की पुस्तकों से पढ़ाई कराई जाती है।
आकाश गंगा स्कूल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यहां के विद्यार्थियों का हर वर्ष जवाहर नवोदय विद्यालय में चयन होता है। अब तक 80 विद्यार्थियों का चयन नवोदय विद्यालय में हो चुका है। इस सफलता का श्रेय वे विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और ग्रामीणों के सहयोग को देते हैं।
संघर्ष से सफलता तक का यह सफर न केवल सुजान सिंह पाल के दृढ़ संकल्प की कहानी है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है।

