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हरदा : भाजपा नेता और एक बड़े अधिकारी के खेत तक करोड़ों की सड़क बना दी लोक निर्माण विभाग ने ! भाजपा सरकार में गरीबों का हक धनाढ्य बाहुबली नेता, अधिकारी ने डकारा !

लोकनिर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री केएल प्रजापति ने सरकार को पहुंचाया करोड़ों का नुकसान, क्या हरदा जिलाधीश महोदय लेगें एक्शन ? क्या होगी निष्पक्ष जांच और कार्यवाही ?

हरदा: मध्यप्रदेश के मुखिया मोहन यादव और उनकी सरकार के मंत्री गाँव गरीब किसान मजदूर को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की बात बड़े बड़े मंचों से करते है। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि उनके अधीनस्थ प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी नेताओं के हाथों की कठपुतली बनकर काम करते है।जिसका जीता जागता उदाहरण हरदा जिले में देखने को मिल रहा है।
हरदा में मंडी निधि की करोड़ों रुपये की सड़के भाजपा नेता के खेतों और भाजपानीत सरकार के रसूखदार अधिकारी के खेतों तक बनाई गई। जिले की दो सड़के अभी सामने आई है। जो भाजपा नेता के खेतों और अधिकारी के फार्म हाउस पर जाकर रुक गई।
जबकि नियमानुसार इन सड़कों को एक गाँव से दूसरे गांव टोला, स्कूल, मुक्ति धाम या धार्मिक मंदिर तक जोड़ना चाहिए था। लेकिन ये सड़के व्यक्ति विशेष नेताओं के खेतों तक डामर ओर सीसी सड़के बनाई गई।

लोकनिर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री के एल प्रजापति के कार्यकाल में करोड़ों रुपये की सड़के मंडी निधि से बनी है।
इन सड़कों में भ्रष्टाचार की बू भी आ रही है। जमकर भ्रष्टचार हुआ। लाखों के बारे न्यारे विभाग और ठेकेदार ने किये। लेकिन शिकायत कोई नहीं करेगा।
क्योंकि ये सड़के आमजन के लिये नहीं सिर्फ भाजपा नेताओं ओर कुछ बड़े अधिकारियों के खेतों तक पहुंची है। जो कि उनको व्यक्तिगत लाभ दिलाने की मंशा सरकार नेताओं की रही।
मालूम हो, ये सड़कें गांव के मुख्य रास्ते से क्रमशः नेता के खेत और अधिकारी के फार्म हाउस पर जाकर खत्म हो जाती है। खासजन के लिए निर्मित इस रास्ते से आमजन को कोई लाभ नहीं है। फिर इन सड़कों पर विभाग द्वारा करोड़ों का व्यय करने का औचित्य ही बहुत बड़ी अबूझ पहेली बन गया है।

◆भाजपा नेता के खेत तक बनी करोड़ों की सड़क

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हरदा जिले में दो सड़के जिनकी लागत करोड़ों रुपये में है। ये सड़के इन दिनों जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।
पहली सड़क हरदा मगरधा मार्ग पर नकवाड़ा से सिंधखेड़ा लगभग 3 किलो मीटर मार्ग बना जो कि एक भाजपा नेता के खेत तक गया। वहां पर वाकायदा सिंधखेड़ा गाँव का बोर्ड लगा है।
लेकिन वहां सिर्फ एक मकान बना हुआ है।
इस तीन किलो मीटर सड़क की लागत लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये है।
वर्ष 2025 में इसका कार्य पूर्ण हो चुका। निर्माण एजेंसी मधुसूदन दोगने ने इसका काम किया। वही वर्ष 2025 में ही एक सड़क ग्राम झाड़पा से ग्राम सिंधखेड़ा के लिये बन रही। जिसे भगवती कंट्रक्शन कंपनी बना रही।
उन्होंने भी पहले से बनी हुई सड़क को छोड़कर अन्य स्थान नहर से से होते हुए झाड़पा मार्ग तक ले गये। जबकि विभाग चाहता तो भाजपा नेता के खेत के पास छोड़ी गई। सड़क से जोड़कर सरकार का करोड़ों रुपये बचा सकता था। लेकिन कमीशन के खेल के चलते व्यक्ति विशेष के दबाब में भाजपा नेता के खेत के आगे का अतिक्रमण नहीं हटाया गया।
वहां प्रशासन ने घुटने टेक दिये। ओर एक किलोमीटर का फेरा का ले आउट डालकर सरकार को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन को इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही करवाना चाहिए। ताकि शासन की राशि का दुरुपयोग न हो।

◆ रसूखदार अधिकारी के फार्म हाउस तक बनी सड़क

इसी प्रकार जिले के खमगांव में भी लगभग डेढ़ किलो मीटर एक सड़क मंडी निधि से एक बड़े अधिकारी के खेत में बने फार्म हाउस तक बनाई गई। इस सड़क की बात करे तो सड़क का निर्माण घटिया हुआ है। रातों रात मिक्सर में बाहर से सीमेंट मसाला लाकर इस सड़क पर डाला गया
ओर सड़क बनकर तैयार हो गई।
वर्तमान में सड़क की स्थिति भी खराब है। साइड सोल्डर में कुछ जगह मिट्टी भरी गई। सड़क में दरारें पड़ गई।
इस सड़क का निर्माण जिस ठेकेदार ने किया। उसका अभी मौके पर बोर्ड भी नहीं लगाया है।

इन दोनों सड़कों को लेकर लोकनिर्माण विभाग के कार्यपालन अधिकारी के. एल. प्रजापति से मकड़ाई एक्सप्रेस ने दो बार उनके कार्यालय जाकर उनका पक्ष जानना चाहा लेकिन उन्होंने विधानसभा सत्र चल रहा अभी समय नहीं है। कहकर पल्ला झाड़ लिया। मालूम हो, केएल प्रजापति जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
देखना होगा कि क्या जिला कलेक्टर सिद्धार्थ जैन इस पूरे मामले में क्या कोई एक्शन लेंगे। या फिर मामला फाइलों में दबकर ही रह जायेगा।