सुमित खत्री
मकड़ाई एक्सप्रेस हंडिया। न धूप की शिकायत, न बारिश का डर और न ही ठंड से बचने की कोई छत… हंडिया के बस स्टैंड पर सड़क ही जैसे गौवंश का ठिकाना बन गई है। गांव में गौशाला संचालित होने के बावजूद बड़ी संख्या में गौवंश सड़कों पर नजर आ रहा है। कई बार खबरें प्रकाशित होने और जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित कराने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
तपती धूप हो या बारिश और कड़ाके की ठंड, सड़क पर घूमता और बैठा गौवंश हर मौसम में खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजारता नजर आता है। वहीं बस स्टैंड जैसे व्यस्त क्षेत्र में सड़क पर गौवंश का जमावड़ा वाहन चालकों और राहगीरों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है। अचानक सड़क पर आने वाले गौवंश के कारण हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।
खबरें बदलीं, तारीखें बदलीं… नहीं बदली तो तस्वीर
इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। तस्वीरें सामने आईं, जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित कराया गया और संभावित दुर्घटना को लेकर सवाल उठाए गए। लेकिन इसके बावजूद सड़क पर गौवंश की मौजूदगी कम होने के बजाय समस्या लगातार दिखाई दे रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हंडिया में गौशाला संचालित है, तो फिर गौवंश सड़कों पर क्यों है? क्या गौशाला तक इन्हें पहुंचाने और वहां सुरक्षित रखने की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है?
गौसेवा सिर्फ भावनाओं तक नहीं, जिम्मेदारी तक भी हो
गौमाता बोल नहीं सकतीं, लेकिन सड़क पर उनकी स्थिति व्यवस्था से कई सवाल जरूर पूछ रही है। गौसेवा केवल पूजा और धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जरूरत के समय उनकी सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही जरूरी है।
अब सवाल ग्राम पंचायत और संबंधित जिम्मेदारों से है—
जब गौशाला मौजूद है और समस्या लंबे समय से सामने है, तो फिर गौवंश को सड़क से गौशाला तक पहुंचाने की ठोस व्यवस्था कब होगी?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है, या जिम्मेदार इससे पहले ही जागकर स्थायी समाधान करेंगे?

