जिंदगी में अलग विचारधारा के लोगो को एक साथ लाना, मेंढक को तराजू में तोलने जैसा होता है
हम अक्सर चाहते हैं कि सब लोग हमारी ही तरह सोचें, हमारी ही राय को सही मानें। हम अपनी बात को जबरदस्ती दूसरों पर थोप देते हैं और फिर दुखी होते हैं कि कोई हमें समझता क्यों नहीं।
सच्चाई ये है कि हर इंसान का नजरिया उसके अनुभव से बनता है। जैसे बाढ़ का पानी किसी के लिए आफत है तो किसी के लिए वीडियो बनाने का मौका, वैसे ही एक ही बात को सब अलग-अलग देखते हैं।एक ही घटना पर सबका दृष्टिकोण अलग अलग होता है।
इसलिए समझदार व्यक्ति वो है जो किसी मुद्दे पर बहस में जीतने की नहीं, बल्कि बात को समझने की कोशिश करता है। वाद-विवाद से नहीं, लेकिन सुमधुर संवाद से हल निकलता है। जब दिमाग गर्म हो तो कोई भी फैसला मत लो, ठंडे दिमाग से सोचा गया एक विचार, गुस्से में बोले गए सौ शब्दों से बेहतर होता है।इसलिए सुनाने से बेहतर सुनना होता है।
आज खुद से वादा करो – सुनोगे ज्यादा, थोपोगे कम।

