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ट्रैफिक डीएसपी संतोष मिश्रा के अभियान और जागरूकता से बची नागरिकों की जानें, हेलमेट-सीट बेल्ट बने रक्षक

नर्मदापुरम में सड़कें हुईं सुरक्षित, तीन माह में 29% कम हुई मौतें  

केके यदुवंशी 

सिवनी मालवा।नर्मदापुरम। जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर किए गए प्रयास रंग ला रहे हैं पुलिस की लगातार चेकिंग और नागरिकों को समझाइश से पिछले सालों ट्रैफिक डीएसपी संतोष मिश्रा के अनुसार नर्मदा पुरम जिले में लगातार एक्सीडेंट में कमी आई है तीन माह के आंकड़ों में सड़क दुर्घटनाओं में 16.54 प्रतिशत और मृत्युदर में 29.11 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यानी पिछले वर्ष की तुलना में लोगों की जान बचाई जा सकी है।

ट्रैफिक डीएसपी संतोष मिश्रा के अनुसार लगातार चलाए जा रहे हेलमेट, सीट बेल्ट और ओवरस्पीडिंग चेकिंग अभियान का सीधा असर दिखा है। रोजाना प्रमुख चौराहों और हाईवे पर सघन चेकिंग की जा रही है। नियम तोड़ने वालों पर सख्त चालानी कार्यवाही से लोग अब मजबूरी में ही सही, हेलमेट और सीट बेल्ट लगाने लगे हैं।

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पुलिस विभाग के अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया और स्कूल-कॉलेजों में चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों से भी लोग सतर्क हुए हैं। हालांकि सबसे बड़ा कारण चालान का डर भी रहा रुपये का चालान कटने से अब लोग जोखिम लेने से बच रहे हैं।पुलिस की कार्रवाई और समझाइश से नतीजे आए हैं इतने अच्छे नतीजों के बाद भी हेलमेट अभियान का अक्सर विरोध देखने को मिलता है।

आमजन का कहना है कि पुलिस सिर्फ दोपहिया चालकों पर ही सख्ती करती है, जबकि सड़कों के गड्ढे, आवारा मवेशी और गलत साइड से आने वाले भारी वाहनों पर कार्यवाही नहीं होती। लोगों का तर्क है कि “सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी है सिर्फ चालान वसूली नहीं।

प्रशासन का दावा है कि ब्लैक स्पॉट सुधार और साइन बोर्ड लगाने का काम भी जारी है। यदि चेकिंग के साथ-साथ सड़कों की हालत भी सुधरे और भारी वाहनों पर भी समान कार्यवाही हो, तो ये आंकड़े और बेहतर हो सकते हैं।

फिलहाल, नर्मदापुरम जिले के ये आंकड़े बता रहे हैं कि सख्ती से जानें बचाई जा सकती हैं। बस जरूरत है नियमों का पालन करने की है