होलीफेथ स्कूल की पुस्तक चिह्नित दुकानों पर, बुक स्टेशनरी दुकानदार प्रिंट रेट से छेड़छाड़ कर 100 रुपए प्रति बुक ज्यादा की राशि वसूल रहे ! स्कूल संचालक बोले हमारा इससे कोई लेना देना नहीं है। पालकों से प्रिंट रेट से ज्यादा वसूलने वाले दुकानदार पर केस दर्ज हो !
मकड़ाई समाचार हरदा: शिक्षा का पाठ पढ़ाने वाले कुछ निजी स्कूल संस्थान ओर उनके चहेते दुकानदार इन दिनों पालकों की जेब में डाका डाल रहे है। गरीब मध्यवर्गीय परिवार के लोग भी मेहनत मजदूरी कर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए बड़े स्कूलों में उनको पढ़ाते है। लेकिन दुर्भाग्य कहे कि शिक्षा और ज्ञान का पाठ पढ़ाने वाले कुछ स्कूल संचालक ओर पुस्तक विक्रेता दुकानदार उनको खुलेआम लुट रहे है।
ताजा मामला हरदा शहर के होलीफेथ स्कूल का सामने आया है। स्कूल की कक्षा पहली से आठवीं कक्षा तक की पुस्तके शहर के दो से तीन दुकानों पर पुस्तक काफी उपलब्ध है। लेकिन दुर्भाग्य कहे कि
इस स्कूल की प्रैक्टिकल ग्रामर की बुक पर प्रिंट रेट 499 रुपए अंकित है। लेकिन पुस्तक विक्रेता उस बुक के ऊपर प्रिंट रेट को ब्लू स्याही से मिटाकर उसके ऊपर अपना खुद का 599 रुपए की MRP का स्टिकर लगाकर पालकों से 100 रूपये प्रति बुक अलग से वसूल रहे है।
जागरूक पालक के कारण इस लुट का हुआ पर्दाफाश !!

बीते दिनों एक पालक ने शहर की चयनिका बुक स्टेशनरी दुकान पर कक्षा 6 वीं की प्रैक्टिकल ग्रामर की बुक खरीदी ।
जागरूक पालक ने प्रिंट रेट लिखे स्थान पर ऊपर लगे स्टीकर को निकाला तो अंदर प्रिंट रेट से काली स्याही से छेड़छाड़ की गई थी।
व्हाइट स्टिकर पर नया 599 रुपए प्रिंट लिखा हुआ स्टिकर दुकानदारों के द्वारा लगाकर पालकों के साथ लुट हो रही है।
मकड़ाई एक्सप्रेस से चर्चा में दुकानदार ने कहा कि हमारे पास निर्माता एजेंसी के पक्के बिल है। हमने इसी रेट में खरीदी है। हमें सिर्फ हमारा कमीशन मिलता है।
जागरूक ग्राहक बोला। पालकों से सीधी सीधी लुट है। स्कूल संचालकों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। ओर ऐसे दुकानदारों ओर पुस्तक प्रकाशन निर्माता के ऊपर भी कार्यवाही होना चाहिए।
जिला प्रशासन पुस्तक विक्रेता दुकानदारों पर कार्यवाही करे
इस संबंध में होली फेथ स्कूल के प्राचार्य से चर्चा कर उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि मुझे इस विषय में कल ही जानकारी मिली । अगर प्रिंट रेट से ज्यादा कोई इस प्रकार पैसा ले रहा है। तो वो गलत है। उन्होंने कहा कि ऐसे पुस्तक विक्रेता दुकानदारों पर प्रशासन कार्यवाही करे।
वही शिक्षा विभाग के डीपीसी यशवंत पटेल ने कहा कि कोई भी व्यक्ति पाठ्य पुस्तकों के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता अगर ऐसा कोई करता है। तो ये धोखाधड़ी है। जो कि अपराध की श्रेणी में आता है। इधर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि लिखित शिकायत मिलने पर जांच कर कार्यवाही करेंगे।।
वही हम आपको बता दे कि एक ही पुस्तक लगभग 500 छात्र छात्राओं ने खरीदी है। इस पुस्तक पर दुकानदार ने लगभग पांच लाख रुपए की काली कमाई कर पालकों को लुटा है। वही इस मामले में स्कूल संचालक की भूमिका क्या है। जांच के बाद ही पता चल पायेगा।
वही मालूम हो कि मध्यप्रदेश के गुना में भी कुछ दुकानदारों ने प्रिंट रेट के ऊपर अपना खुद का मनमाना स्टिकर लगाकर पुस्तके बेची थी। उक्त मामले में FIR दर्ज हुई थी।
देखना होगा हरदा का शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्यवाही करता है।


