भोपाल-इंदौर जैसे बड़े शहर भी पिछड़े, पेयजल-सीवरेज सुधार की रफ्तार धीमी
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 भोपाल। मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की अटल मिशन फॉर रेजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन यानी अमृत योजना के तहत चल रहे 5000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट अटक गए हैं। योजना का मकसद शहरों में शुद्ध पेयजल और बेहतर सीवरेज सिस्टम देना है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।
15 जिलों में काम की रफ्तार सुस्त
प्रदेश के 15 जिलों में अमृत योजना के तहत अब तक सिर्फ 55% काम ही पूरा हो पाया है। तय समयसीमा बीतने के बाद भी कई जगह पाइपलाइन बिछाने, ट्रीटमेंट प्लांट बनाने और घर-घर कनेक्शन देने का काम अधूरा पड़ा है। इससे आम लोगों को गर्मी में पानी की किल्लत और बारिश में जलभराव की समस्या झेलनी पड़ रही है।
बड़े शहर भी पीछे
हैरानी की बात यह है कि भोपाल और इंदौर जैसे महानगर भी इस योजना में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। इन शहरों में भी प्रोजेक्ट की प्रगति राष्ट्रीय औसत से कम है। कई इलाकों में अभी तक सीवर लाइन नहीं बिछी है और पेयजल आपूर्ति के लिए पुराने सिस्टम पर ही निर्भरता बनी हुई है।
क्या है अमृत योजना
अमृत योजना के तहत शहरों में हर घर नल से जल, सीवरेज कनेक्शन, पार्कों का विकास और शहरी परिवहन को बेहतर करना शामिल है। पहले चरण अमृत 1.0 की धीमी रफ्तार के कारण अमृत 2.0 में भी देरी हो रही है।
प्रशासन का पक्ष
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण, ठेकेदारों की लापरवाही और तकनीकी दिक्कतों के कारण काम में देरी हुई है। अब काम में तेजी लाने के लिए हर 15 दिन में समीक्षा बैठक करने के निर्देश दिए गए हैं। मानसून से पहले ड्रेनेज और सीवरेज के अधूरे काम पूरे करने का टारगेट रखा गया है।

