विक्रांत सिंह कुमरे फिर बने आदिवासी समाज के मसीहा : तमिलनाडु में बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए बैतूल के 24 जनजातीय मजदूरो को !
भोपाल: मध्यप्रदेश के बैतूल जिला के जनजाति बाहुल्य क्षेत्र भीमपुर से रोजगार की तलाश में तमिलनाडु गए 24 जनजातीय मजदूरों को बंधुआ मजदूरी के चंगुल से मुक्त कराया गया है। ये सभी मजदूर तमिलनाडु के इरोड जिला में गन्ने के खेतों में कटाई का काम करने गए थे,
जहां उनसे दशहरा से जबरन काम करवाया जा रहा था और उन्हें बंधुआ मजदूरों की तरह रखा गया था। जब इस विषय की जानकारी एडवोकेट विक्रांत सिंह कुमरे को लगी तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए। National Commission for Scheduled Tribes (NCST) के सहयोग से सभी मजदूरों को मुक्त करवाया।
मिली जानकारी के अनुसार मजदूरों को अधिक मजदूरी और बेहतर रोजगार का लालच देकर दक्षिण भारत ले जाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनसे लगातार कठिन श्रम कराया जा रहा था और उन्हें स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति भी नहीं दी जा रही थी। उनका शारीरिक एवं मानसिक शोषण हो रहा था। मजदूरों की स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होती जा रही थी और वे अपने घर लौटने में भी असमर्थ हो गए थे।
इस गंभीर मामले की सूचना मिलते ही वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यकर्ता एवं सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता विक्रांत सिंह कुमरे ने तुरंत सक्रियता दिखाई। उन्होंने देर रात ही तमिलनाडु पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी और मजदूरों को तत्काल मुक्त कराने की मांग की।
बताया जाता है कि अधिवक्ता विक्रांत सिंह कुमरे ने सीधे तमिलनाडु पुलिस के शीर्ष अधिकारियों DGP वेंकटरमण ji तथा ADGP लॉ एंड ऑर्डर महेश्वर दयालजी से चर्चा की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर सभी 24 मजदूरों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया।
इस पूरी कार्रवाई में National Commission for Scheduled Tribes (NCST) का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा, जिससे यह सुनिश्चित किया गया कि मजदूरों को सुरक्षित तरीके से मुक्त कराया जाए और उनके अधिकारों की रक्षा हो सके।
मुक्त कराए गए सभी मजदूर मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के जनजातीय क्षेत्र भीमपुर के निवासी हैं। आर्थिक मजबूरी के कारण वे रोजगार की तलाश में तमिलनाडु गए थे, लेकिन वहां उन्हें शोषण और बंधन का सामना करना पड़ा। समय पर हस्तक्षेप होने से सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
मुक्त होने के बाद मजदूरों ने तमिलनाडु पुलिस, एनसीएसटी और सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता विक्रांत सिंह कुमरे का हृदय से आभार व्यक्त किया। मजदूरों ने कहा कि समय पर सहायता मिलने से वे एक बड़ी मुसीबत से बाहर निकल सके।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता विक्रांत सिंह कुमरे लंबे समय से जनजातीय समाज और मजदूरों के अधिकारों के लिए कार्य कर रहे हैं। इससे पहले भी वे देश के विभिन्न राज्यों से 350 से अधिक मजदूरों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उनके इस कार्य की सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की जा रही है।

