jhankar
ब्रेकिंग
MP में 4-5 अगस्त से फिर हैवी रेन का अलर्ट भोपाल-इंदौर समेत अधिकांश जिलों में आज हल्की बारिश अब मान... इंदौर: 21 अवैध कॉलोनियां घोषित, खसरे में दर्ज होंगी, खरीदी-बिक्री पर रोक जिला प्रशासन की बड़ी कार्र... MSP बढ़ने से मंडी में मूंग की आवक बढ़ी: एक दिन में 477 क्विंटल खरीदी, 4 किमी तक लगी लाइन मासूमों की जान से खिलवाड़: 25 बच्चों को ठूंसकर दौड़ रही स्कूल वैन जब्त आज 2 अगस्त 2026 को हरदा की खास खबरे टिमरनी : टिमरनी पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई 24 घंटे में लूट का खुलासा, महिला सहित तीन आरोपी गिरफ्तार... बीमा कराने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 17 अगस्त कर दी गई है सात दिवसीय प्रशिक्षण के तहत सिविल डिफेंस वालेंटियर्स को दिया प्रशिक्षण मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद की विकासखण्ड स्तरीय मासिक बैठक संपन्न इंदौर: पानी की टंकी में मिला युवक का शव, 6 दिन से था लापता दुर्गंध आने पर खुला मामला

कालाष्टमी : मानव जीवन के समस्त भय को दूर करते है, भगवान काल भैरव

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 मार्च 2024 को सुबह 08.44 बजे शुरू होगी और 4 मार्च 2024 को सुबह 08.49 बजे खत्म होगी।

- Install Android App -

भगवान भैरव की साधना आराधना से जीवन का भय दूर होता है। भैरव का अर्थ ही है जो भय का दूर करें मतलब भय को हरे वही भैरव। भगवान भैरव को भगवान का शिव का ही रुप माना जाता है। हर माह की कृष्णपक्ष की अष्टमी को भगवान भैरव का विशेष पूजन किया जाता है। वर्ष 2024 के फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 मार्च 2024 को सुबह 08.44 बजे शुरू होगी और 4 मार्च 2024 को सुबह 08.49 बजे खत्म होगी।इस दौरान भगवान काल भैरव की आराधना करने से व्यक्ति को जीवन में कभी दुखों का सामना नहीं करना पड़ता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह चल रहा है, और इस माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता है कि कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव की पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। जीवन में कई प्रकार रोग, दोष, उपरी बाधा, तांत्रिक क्रियाओं और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है। हिंदू धर्म मेें अधिकांश परिवार मेें कुलदेवता कुलभैरव बटुक भैरव होते है।जिनका पूजन करना आवश्यक होता है नही तो कई प्रकार की परेशानियां इंसान को भुगतनी पड़ती है।
भगवान भैरव के पूजन में सफेद या लाल रंग के वस्त्र और फूलों का उपयोग करें। नैवेद्ध भजिए पापड़,उड़द की रोटी मिठाई आदि। तांत्रिक पूजन करने वाले अपने पूजन में काले रंग की वस्तुओं का उपयोग करते है। सामान्य गृहस्थ को सुबह शाम सरसो तिल के तेल का दिया भगवान भैरव के सम्मुख लगाना चाहिए। अपने जीवन की मनोकामना उन्हे बोलना चाहिए। भगवान भैरव की सकाम साधना की जाती है मतलब आपकी मनोकामना बोलना जरुरी है।अपनी एक मनोकामना की पूर्णता का संकल्प लेकर कालाष्टमी से अगली कालाष्टमी तक भगवान भैरव का पूजन नियमित करिए।जीवन में हर प्रकार के भय को भगवान भैरव दूर करते हैं सच्चे हृदय से उन्हें याद करें और अपने जीवन रक्षाकारक देव के रुप में स्थान दीजिए। जितना भयंकर रुप है उतने ही प्रभु दयालु है।भगवान भैरव के हर रुप में आराधना की जाती है। भगवान भैरव का सात्विक,राजसिक और तामसिक तीनों रुप में पूजन किया जाता है। सबसे ज्यादा बटुक भैरव रुप ज्यादा लोगो द्वारा पूजन किया जाता है। भैरव जी का वाहन श्वान है। इस बार की कालाष्टमी पर भगवान भैरव का पूजन कर इच्छित लाभ लें।