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शिक्षा बनाम स्वास्थ

लॉक डाउन में ऑनलाइन क्लास शुरू की गई है। सभी स्कूलों द्वारा शिक्षा को जारी रखने के लिए। किन्तु इस से छात्रों के स्वास्थ पर पड़ने वाला बूरा असर कैसा है। यह हम सोच ही नहीं रहें हैं। बच्चों की आँखो और कानों में दर्द होना एक बहुत ही आम समस्या हो गई है। सर दर्द जैसी समस्या भी देखने को मिल रही है। बच्चों के सीखने और समझने की शक्ति पर भी फर्क पड़ता है। बच्चों के याद रखने की क्षमता भी कमजोर हो रहीं हैं।

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बच्चों का बाहर जा कर खेलना कूदना बंद है और ऑनलाइन क्लासेस के लिए वह घंटों फोन या लेपटॉप जैसी किसी ना किसी स्क्रीन के सामने बैठें रहते हैं। सब की मजबूरी और बच्चों का स्वास्थ्य सब की फ़िक्र ना करते हुए बस हम एक ऐसे सिस्टम का प्रयोग अपने देश में शिक्षा के लिए कर रहे हैं। जिसके प्रयोग से हम शिक्षा के नाम को जीवित रख रहे हैं। उसको प्रत्येक बच्चे तक नहीं पहुंचा रहे हैं। जिन बच्चों तक यह पहुंच भी रही है। वह बच्चे भी इनके नुकसान झेल रहे हैं। ऑनलाइन क्लासेस के चलते बच्चों की आंखों का पानी सुखने, आंखों में दर्द और सुजन जैसी समस्या हो जाती है। बच्चों का कद छोटा ही रह सकता है अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठने पर। गर्दन, कमर में दर्द हो सकता है और उनकी स्पाइन में भी दिक्कत आ सकती है। बच्चों में चिड़चिड़ा पन बढ़ रहा है, वह बाहर नहीं जा सकते हैं। अपने मित्रों से मिलना-जुलना नहीं कर सकते हैं। बच्चों में मोबाइल और लैपटॉप का प्रयोग थकान और कमजोरी बढ़ा देता है। जिसके चलते बच्चों में चिड़चिड़ा पन बढ़ सकता है।

ऑनलाइन शिक्षा बच्चों के स्वास्थ्य पर बहुत ही बूरा असर डाल रहीं हैं। हमें इसके हल खोजने होंगे। बच्चों को मजबूरी और किस्मत के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं। सरकारों को इस साल सभी कक्षाओं का पाठ्यक्रम कम करना चाहिए। छोटी क्लास के बच्चों को अधिक से अधिक गृह कार्य दिया जा सकता है, ऑनलाइन क्लास लेने के स्थान पर। माता-पिता भी बच्चों को पढ़ा सकते हैं। बड़ी क्लास के छात्रों की वहीं क्लास होनी चाहिए जिनकी बहुत अधिक आवश्यकता है।
गृह कार्य ऑनलाइन माध्यम से करने के लिए दे कर ऑफ लाइन माध्यम से देने का प्रयास करना चाहिए। शिक्षा जरूरी है लेकिन स्वास्थ्य भी जरूरी है। मानसिक तनाव की स्थिति में बच्चे कैसे शिक्षित होंगे।
राखी सरोज