आमजन जमीन के सौदे मे धोखाधड़ी से कैसे बचें -पूरी जानकारी
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 हरदा। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा धोखाधड़ी जमीन के सौदों में होती है। कस्बाई छोटे शहरों में। सस्ते के चक्कर में लोग अवैध कॉलोनी में प्लॉट ले लेते हैं और बाद में रजिस्ट्री, नामांतरण, लोन और नक्शा पास नहीं होता। इसे समझना बहुत जरूरी है।
कोई प्लॉट सरकारी नियम से कब अवैध कहलाता है…?
अगर इनमें से एक भी चीज नहीं है तो समझो प्लॉट अवैध है:
कॉलोनी का लाइसेंस नहीं है- MP में कोई भी कॉलोनाइजर अगर जमीन काटकर 10 से ज्यादा प्लॉट बेचता है तो उसे पहले T&CP (Town and Country Planning) से लेआउट अप्रूवल लेना अनिवार्य है। 2023 के नए नियमों के बाद ग्राम पंचायत क्षेत्र में भी कॉलोनी लाइसेंस जरूरी है।
डायवर्शन (धारा 172) नहीं हुआ- खेती की जमीन को रहवासी में बदलने के लिए SDM से डायवर्शन कराना होता है। बिना डायवर्शन के प्लॉट पर घर बनाना अवैध है।
अवैध कॉलोनी में है-
नगरपालिका / पंचायत द्वारा घोषित अवैध कॉलोनी सूची में अगर कॉलोनी है तो वह अवैध है। MP में हर जिले की वेबसाइट पर अवैध कॉलोनियों की सूची डाली जाती है।
बटान (टुकड़ों में बिक्री) का नियम टूटा है – MP Land Revenue Code के अनुसार खेती की जमीन को बिना लेआउट के छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर बेचना (Plotting) गैरकानूनी है।
शासकीय जमीन, नाला, पहाड़, आबादी से लगा हो- अगर प्लॉट – सरकारी चरनोई, निस्तार, तालाब, नाले, 33 KV लाइन के नीचे, या मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट में आता है तो वह कभी वैध नहीं होगा।
वैध प्लॉट की पहचान कैसे करें… ?
खरीदने से पहले 7 चेक
कोई भी टोकन मनी देने से पहले ये कागज जरूर मांगें:
T&CP Approved Layout Map – उस पर कॉलोनी का नाम, खसरा नंबर और T&CP की सील और नंबर होना चाहिए।
कॉलोनाइजर लाइसेंस / पंजीयन प्रमाण पत्र – RERA से रजिस्टर्ड है या नहीं।
भू-स्वामी का रिकॉर्ड – खसरा, खतौनी, B-1, नक्शा। खसरा पर किसका नाम है? क्या वह कॉलोनाइजर ही है?
डायवर्शन आदेश – 172 की कॉपी।
बंधक / कर्ज (Encumbrance) नहीं – जमीन बैंक में बंधक तो नहीं है? रजिस्ट्रार ऑफिस से सर्च रिपोर्ट निकलवाएं।
रजिस्ट्री का पिछला रिकॉर्ड – Chain of Title। जमीन पहले किसकी थी, 10 साल का इतिहास।
NOCs – अगर बड़ी कॉलोनी है तो नगर पालिका से विकास अनुमति।
सबसे आसान तरीका- MP RERA की वेबसाइट *rera.mp.gov.in* पर जाकर “Registered Projects” में कॉलोनी का नाम या खसरा सर्च करें। अगर वहां नाम नहीं है और 500 वर्गमीटर से बड़ी कॉलोनी है तो 99% अवैध है।
RERA की क्या भूमिका है रहवासी क्षेत्र में…?
RERA (Real Estate Regulatory Authority) आम आदमी के लिए सबसे बड़ा हथियार है, जो 1 मई 2017 से लागू है।
RERA का काम
रजिस्ट्रेशन अनिवार्य- 500 वर्गमीटर से ज्यादा या 8 प्लॉट से ज्यादा वाली हर नई कॉलोनी को RERA में रजिस्टर करना अनिवार्य है। बिना RERA नंबर के विज्ञापन देना भी अपराध है।
पैसा सुरक्षित- कॉलोनाइजर आपसे लिया गया 70% पैसा अलग Escrow Account में रखेगा, उसी से विकास कार्य (रोड, नाली, बिजली) करेगा। पैसा लेकर भाग नहीं सकता।
समय पर कब्जा- RERA में लिखा होता है कि रोड, लाइट, पानी कब तक देगा। अगर नहीं दिया तो आप RERA में शिकायत कर ब्याज सहित पैसा वापस ले सकते हैं।
झूठे वादों पर रोक- ब्रोशर में अगर पार्क, मंदिर, क्लब हाउस दिखाया और नहीं दिया तो जुर्माना लगता है।
MP में RERA में शिकायत कैसे करें?
http://rera.mp.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत – सिर्फ 1000 रुपये फीस। 60 दिन में सुनवाई।
अगर आपने अवैध कॉलोनी में प्लॉट ले लिया है तो वैध कैसे कराएं….?
MP सरकार ने अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए नियम बनाए हैं, लेकिन शर्तें हैं:
वैध होने की शर्तें
– कॉलोनी कम से कम 60% आबाद हो।
– सरकारी जमीन पर न हो।
– नाले/ग्रीन बेल्ट पर न हो।
अवैध को वैध करने की प्रक्रिया
नगर पालिका / पंचायत में आवेदन- कॉलोनी के रहवासी मिलकर एक समिति बनाएं और वैधीकरण के लिए आवेदन दें।
T&CP से ले-आउट नियमितीकरण- कॉलोनाइजर या समिति को T&CP से शुल्क देकर ले-आउट पास कराना होगा। विकास शुल्क (प्रति वर्गमीटर 150-300 रुपये तक) जमा करना होता है।
डायवर्शन शुल्क जमा- SDM ऑफिस में डायवर्शन का जुर्माना भरकर आदेश लेना।
रजिस्ट्री के बाद नामांतरण- वैधीकरण के बाद ही नगरपालिका में नामांतरण और भवन अनुज्ञा (नक्शा पास) मिलेगा।
अगर कॉलोनी सरकारी जमीन या नाले पर है तो वह कभी वैध नहीं होगी, चाहे कितना भी पैसा भर दें।
जमीन की धोखाधड़ी से बचने के 5 सुनहरे नियम जाने
रजिस्ट्री ही मालिकाना हक नहीं – सिर्फ रजिस्ट्री से मालिक नहीं बनते। रजिस्ट्री के बाद नामांतरण (Mutation) और खसरे में नाम आना जरूरी है।
एग्रीमेंट पर प्लॉट कभी न लें – सिर्फ स्टाम्प पर एग्रीमेंट, नोटरी, पॉवर ऑफ अटॉर्नी पर प्लॉट लेना सबसे बड़ी गलती है। सिर्फ पक्की रजिस्ट्री करें।
सस्ता मतलब खतरा – बाजार से 30-40% सस्ता प्लॉट मिल रहा है तो 100% कुछ गड़बड़ है।
लोन चेक – अगर बैंक उस कॉलोनी में लोन नहीं दे रहा तो समझ जाओ कागज में कमी है। SBI, HDFC जैसी बैंक अवैध कॉलोनी में लोन नहीं देतीं।
स्थानीय पटवारी से मिलें – खरीदने से पहले खसरे को लेकर पटवारी और तहसीलदार से मिल लें, 500 रुपये बचाने के लिए लाखों मत फंसाइए।
विशेष ध्यान दे आप जब कोई भी प्लॉट खरीदें तो एक बार किसी अच्छे वकील से 1000-2000 रुपये देकर कागज की जांच जरूर कराएं। और हां, पचोर तहसील में किसी भी जमीन का खसरा आप MP Bhulekh (mpbhulekh.gov.in) पर फ्री में देख सकते हैं।

