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देश भर के 15 लाख बिजली कर्मचारी व इंजीनियर द्वारा संपूर्ण कार्य बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन करेंगे

सुनील पटल्या बेड़िया। यूनाइटेड फोरम के नेतृत्व में मांगो को लेकर प्रदेश के बिजली कर्मचारी व इंजीनियर सोमवार को एक दिवसीय सम्पूर्ण कार्य का बहिष्कार करेंगे। फोरम के कर्मचारियों ने बताया कि एनसीसीओईई ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बिजली कानून में व्यापक बदलाव वाले इस बिल को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय इसे संसद की बिजली मामलों की स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाना चाहिए। और कमेटी के सामने बिजली उपभोक्ताओं व बिजली कर्मियों को अपने विचार रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में उत्पादन का लाइसेन्स समाप्त कर बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन का निजीकरण किया गया। जिसके परिणाम स्वरुप देश की जनता को निजी घरानों से बहुत महंगी बिजली की मार झेलनी पड़ रही है। अब इलेक्ट्रिसिटी ( अमेंडमेंट ) बिल 2021 के जरिये बिजली वितरण का लाइसेंस लेने की शर्त समाप्त की जा रही है।

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जिससे बिजली वितरण के सम्पूर्ण निजीकरण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। इस बिल में प्रावधान है कि किसी भी क्षेत्र में एक से अधिक बिजली कम्पनियाँ बिना लाइसेंस लिए कार्य कर सकेंगी और बिजली वितरण हेतु यह निजी कम्पनियाँ सरकारी वितरण कम्पनी का इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्क इस्तेमाल करेंगी। निजी कम्पनियाँ केवल मुनाफे वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को ही बिजली देंगी। जिससे सरकारी बिजली कंपनी की वित्तीय हालत और खराब हो जाएगी। इस प्रकार नए बिल के जरिये सरकार बिजली वितरण का सम्पूर्ण निजीकरण करने जा रही है जो किसानों और गरीब घरेलू उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। म.प्र. स्तर की अन्य मांगों में ट्रासमिशन कंपनी में लाई जा रही टी.बी.सी.बी. को रद्द करने, संविदा को नियमित करने, आऊटसोर्स का संविलियन करने सभी अधिकारी कर्मचारियों को मुख्यमंत्री कोविड -19 कल्याण योजना में शामिल करने, बिना शर्त अनुकंपा नियुक्ति, पेंशन की व्यवस्था, सभी वर्गो की पदोन्नतियां, सभी प्रकार के वेतन विसंगतियां दूर करने, सेवा निवृत उपरांत सभी प्रकार की राशि का समय से भुगतान करने,  28 प्रतिशत डीए प्रदान करने, पदोन्नति में लगी रोक हटाकर पदोन्नति करते हुये रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने, ग्रह जिले मे पदस्थापना करने, सभी वर्गों को 50 प्रतिशत विद्युत छुट देने, अधोसंरचना अनुसार संगठनात्मक संरचना निर्धारित करने, सभी कंपनियों में आदेशों में एकरूपता लाने एवं अन्य मांगों के संबंध में माननीय मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री को 20 जुलाई को मांग पत्र सौंपा जा चुका था।
जिसमें मांगों पर विचार न होने की स्थिति में चरण बद्ध आंदोलन की रूपरेखा भी दी गई थी। लेकिन शासन प्रशासन द्वारा उक्त मांगों को संज्ञान में न लेने के कारण सोमवार को बहिष्कार किया जाना प्रस्तावित है। जिसमें सभी अधिकारी कर्मचारी मोबाईल बन्द रखेगें एवं कार्यालय में उपस्थित नहीं होगें। यूनाइटेड फोरम के जिला संयोजक दिलीप शर्मा ने बताया कि इस कार्य बहिस्कार में उपकेन्द्र एवं शिफ्ट ड्यूटी के कार्यों को अलग रखा गया है। अन्य पदाधिकारी एवं अधिकारी, कर्मचारी साथी श्री सौरभ साहू, धीरज पाटीदार, जितेन्द्र सावनेर , अनिल केसरवानी, लोकेश भूमरकर, संदीप पाटिल, रवि शुक्ला, जय परमानन्दानी, कुंदन भवर, आनंद कुर्वंशी, भरत बिरला, जितेंद्रसिंह चौहान, अवधेश शर्मा ,राजेश साद, भूपेंद्र चौहान, शेलेन्द्र  दसोंधी, कैलाश नागर, शुभम राठौर, मुकेश कनेल, सचिन राहुले, लखन कुशवाह, गोपाल यादव एवं अन्य साथी कर्मियों ने जनता से निजीकरण के विरोध में फोरम के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की अपील की है।