देश में मूंग दाल की कमी, विदेश से मंगानी पड़ रही है दाल केंद्र ने कम रखा मप्र का खरीदी कोटा किसान आंदोलन ने मप्र सरकार की आंख खोली
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 भोपाल। एक समय देश में अनाज सब्जी उत्पादन और दालों की कमी के चलते वर्षों से “दाल-रोटी खाओ, प्रभु के गुण गाओ” कहा जाता था। अब स्थिति यह हो गई है कि देशवासियों के लिए पर्याप्त तुंवर मूंग मसूर उड़द दाल ही उपलब्ध नहीं है। इसका मुख्य कारण दाल उत्पादन को प्रोत्साहित न किया जाना है।
मप्र में अच्छा उत्पादन, फिर भी केंद्र ने कम क्यों किया कोटा
मध्य प्रदेश में इस बार मूंग का उत्पादन अच्छा हुआ है। लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदी का कोटा सिर्फ 25% ही तय किया है। इसका महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा जब केंद्र सरकार ने मूंग खरीदी के लिए कांफ्रेंस की थी उस समय अन्य राज्यो के कृषि मंत्री शामिल हुए मप्र कृषिमंत्री और विभाग सचिव निशांत बरबढे़ मौजूद नही थे। इसलिए 25 प्रतिशत कोटा मिला।
केंद्र के कृषि मंत्रालय और मप्र सरकार के बीच इसी बात को लेकर सियासत चल रही है। जानकारों का कहना है कि मप्र सरकार के कृषि विभाग के मंत्री और अधिकारी केंद्र से कोटा बढ़ाने को लेकर गंभीर नहीं थे। नतीजा यह हुआ कि अब राज्य को अपना कोटा 60% तक बढ़ाना पड़ा है, जिससे सरकार पर 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा।
दलहन और तिलहन मिशन में पीछे हुआ भारत
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक और उपभोक्ता है। अभी देश में सालाना करीब 240-250 लाख टन दलहन का उत्पादन होता है। जबकि जरूरत 50-70 लाख टन अधिक है। इसलिए हर साल 50-70 लाख टन दालों का आयात करना पड़ता है।
केंद्र सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक दलहन उत्पादन 350 लाख टन यानी 35 मिलियन टन तक पहुंचाना है, ताकि देश आत्मनिर्भर बन सके। लेकिन उत्पादन उसी गति से नहीं बढ़ पा रहा है।
प्रमुख चिंता: भंडारण और खरीद में लापरवाही
देश में दलहन-तिलहन की कमी लंबे समय से है। मूंग, उड़द, मसूर, मूंगफली और सोयाबीन जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार बैठकें कर रही हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस विषय में लगातार बैठकें ले रहे हैं। लक्ष्य है कि 2027-28 तक दलहन में आत्मनिर्भर बना जाए।
लेकिन किसानों को दलहन बोने के लिए प्रोत्साहित करने और एमएसपी पर प्रभावी खरीद बढ़ाने की जरूरत है।
मध्य प्रदेश के लिए क्यों अहम है ये मुद्दा
मध्य प्रदेश देश के प्रमुख मूंग उत्पादक राज्यों में से एक है। अगर केंद्र सरकार आत्मनिर्भरता मिशन के तहत मूंग की व्यापक एमएसपी खरीदी सुनिश्चित करती तो किसानों को उचित मूल्य मिलता। इससे दलहन का रकबा बढ़ता और देश का आयात बिल भी घटता।
यही वजह है कि हाल के महीनों में मूंग खरीदी का मुद्दा केवल किसानों का नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन से भी सीधे जुड़ा माना जा रहा है।
अब सरकार अपनी मूंग खरीदी पर समीक्षा कर रही
बैठकों में सरकार को दलहन क्षेत्रफल बढ़ाने, उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने, अनुसंधान, नई किस्मों का विकास, भंडारण क्षमता बढ़ाने और किसानों को एमएसपी पर खरीद का भरोसा देने पर जोर दिया गया है।
किसान आंदोलन ने सरकार को जगाया
विगत दिनों हुए किसान आंदोलन ने मप्र सरकार की आख खोल कर रख दी। पूरे मप्र से हजारो कि तादात में किसानो ने शतप्रतिशत मूंग खरीदी की मांग को लेकर प्रदेश की राजधानी में हल्ला बोला प्रदेश की मोहन सरकार बैकफुट पर आई और किसानो को भरोसा दिलाया कि मूंग खरीदी में कोई लापरवाही नही होगी।

