गलवान झड़प के 6 साल बाद भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग, BRICS समिट में शामिल होने की संभावना 2020 के बाद पहली बार भारत दौरे पर आएंगे चीनी राष्ट्रपति
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 दिल्ली
। भारत-चीन संबंधों में अहम मोड़ आ सकता है। सूत्रों के अनुसार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आ सकते हैं।
अगर यह दौरा होता है तो यह गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी। जून 2020 की उस झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे।
12-13 सितंबर को संभावित दौरा
बताया जा रहा है कि शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं। शी जिनपिंग 2013 से चीन के राष्ट्रपति हैं और अब तक 3 बार भारत आ चुके हैं।
उनकी आखिरी भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी, जो LAC पर सैन्य टकराव से कुछ महीने पहले हुई थी।
रिश्तों में सामान्यता की ओर अहम कदम
लद्दाख सीमा पर वर्षों तक चले सैन्य गतिरोध के बाद भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। ऐसे में शी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।
दौरा से पहले बढ़ेगी राजनयिक गतिविधि
शी के प्रस्तावित दौरे से पहले नई दिल्ली और बीजिंग के बीच राजनयिक बातचीत तेज होने की उम्मीद है।
– WMCC बैठक : आने वाले हफ्तों में भारत-चीन सीमा मामलों पर ‘परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र’ यानी WMCC की बैठक हो सकती है।
– NSA स्तर की बातचीत : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के भी उच्च-स्तरीय बातचीत के लिए चीन जाने की संभावना है। तारीखें अभी तय की जा रही हैं।
इसके बाद सीमा विवाद पर दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच भी चर्चा होगी।
द्विपक्षीय बैठक पर सबकी नजरें
इस दौरे का सबसे अहम पहलू यह होगा कि क्या समिट के दौरान भारत और चीन के शीर्ष नेताओं के बीच कोई द्विपक्षीय बैठक होती है या नहीं। ऐसी बैठक में सीमा विवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और एशिया के सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य पर चर्चा हो सकती है।
वैश्विक चुनौतियां ला रही हैं दोनों देशों को करीब
यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि इस समय भारत और चीन दोनों ही वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ संबंधी फैसले और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता शामिल है।
अगर यह दौरा होता है तो यह लगभग 6 साल में शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी।

