जानिए कौन हैं माँ स्कंदमाता…?
नवरात्रि के पांचवें दिन माँ दुर्गा के पांचवें स्वरूप माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। माँ के इस रूप में ममता और शक्ति दोनों का संगम है। गोद में भगवान स्कंद को लिए हुए यह स्वरूप भक्तों को वात्सल्य और सुरक्षा का एहसास कराता है।
पूजन विधि
आज के दिन सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें क्योंकि माँ को पीला रंग प्रिय है। चौकी पर माँ स्कंदमाता की प्रतिमा स्थापित कर गंगाजल से शुद्ध करें। माँ को पीले फूल, केला और केसर की खीर का भोग लगाएं।
पूजन में “ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। माँ की आरती करें और स्कंदमाता स्तोत्र का पाठ करें। इस दिन छोटे बच्चों को केले और खिलौने दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
पौराणिक कथा
कथा के अनुसार जब राक्षस तारकासुर ने घोर तपस्या कर वरदान पाया कि उसका वध केवल शिव पुत्र ही कर सकता है, तब सभी देवता चिंतित हो गए। तब भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र के रूप में कार्तिकेय का जन्म हुआ। कार्तिकेय ने ही तारकासुर का वध किया। अपने पुत्र को युद्ध के लिए प्रशिक्षण देने वाली और रक्षा करने वाली माता के रूप में माँ पार्वती स्कंदमाता कहलाईं।
महत्व और लाभ
माँ स्कंदमाता की पूजा से संतान सुख, बुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जिन लोगों को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है, उनके लिए आज का दिन सबसे उत्तम है। माँ की कृपा से मूर्ख भी ज्ञानी बन जाता है और जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

