टेम्परेरी कनेक्शन के लिए 6,500 रुपये से अधिक जमा करने का दबाव बनाने का दावा, 5,000 रुपये लेने के बाद लौटाने का भी आरोप
दिनेश अखाड़िया | मकड़ाई समाचार ✍️
झाबुआ। राणापुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत ढोलियावाड़ में विद्युत विभाग की कार्रवाई को लेकर किसानों में नाराजगी सामने आई है। किसानों का आरोप है कि विभाग की टीम ने नाले और कुएं से तीन किसानों की पानी की मोटरें निकालकर जब्त कर लीं। वहीं, टेम्परेरी विद्युत कनेक्शन की राशि और रसीद को लेकर भी विवाद होने की बात कही जा रही है।
इन किसानों की मोटरें जब्त करने का आरोप
किसानों के अनुसार, जिनकी मोटरें जब्त की गई हैं, उनके नाम इस प्रकार हैं—
रण सिंह पिता उगरिया
नवल सिंह पिता रघु सिंह
भैया पिता छगन
पानी की कमी के बीच कार्रवाई पर उठाए सवाल
किसानों का कहना है कि इस वर्ष ढोलियावाड़ क्षेत्र के तालाबों और कुओं में पानी की कमी है। नलों में भी पानी की आवक कम होने के कारण सिंचाई प्रभावित हो रही है। किसानों के मुताबिक, वे नई फसल लेने की स्थिति में नहीं हैं और केवल थोड़ी-बहुत बची कपास की फसल को बचाने के लिए पानी चला रहे हैं। ऐसे समय में मोटरें जब्त किए जाने से उनकी परेशानी बढ़ गई है।
5,000 रुपये लेने और लौटाने का आरोप
मामले में किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दो मोटरें छुड़वाने के संबंध में मौके पर ग्रामीणों के सामने बातचीत हुई थी। किसानों का दावा है कि इस दौरान 5,000 रुपये अधिकारी को दिए गए, लेकिन बाद में अधिकारी अपनी बात से मुकर गए और पैसे वापस कर चले गए।
किसानों के अनुसार, जब उन्होंने भुगतान की रसीद मांगी तो उन्हें पूरी टेम्परेरी कनेक्शन राशि जमा करने के बाद ही रसीद मिलने की बात कही गई। किसानों का दावा है कि उनसे इसके लिए 6,500 रुपये से अधिक जमा करने को कहा जा रहा है। बिना रसीद भुगतान की मांग को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई है।
हालांकि, पैसे लेने और लौटाने सहित लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विद्युत विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।
किसानों ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
पीड़ित किसानों ने झाबुआ कलेक्टर, राणापुर एसडीएम और विद्युत वितरण कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं—
जब्त की गई तीनों मोटरें वापस दिलाई जाएं।
बिना रसीद पैसे मांगने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
तालाबों और कुओं में पानी की वास्तविक स्थिति का मौके पर निरीक्षण किया जाए।
किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने पर रोक लगे।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और विद्युत विभाग किसानों की शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं।

