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महिला सरपंच को दबंगों ने लाठियों से पीटा, विरोध में सामने आ रहे नेताओं के बयान

मकड़ाई समाचार सतना। जातिवाद के लिए सतना जिला लगातार बदनाम होता जा रहा है। यहां एक बार फिर दबंगों द्वारा दलितों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। इतना ही नहीं दबंगों ने ग्राम सभा के दौरान दलित महिला सरपंच को भी लाठियों से पीटा। इस दौरान बीच बचाव करने आए लोगों की भी लात जूतों से की पिटाई की गई। मामला मैहर के नादन देहात थाना अंतर्गत ग्राम जरियारी का है, जहां पर शासन के निर्देशों के तहत शुक्रवार को ग्राम सभा का आयोजन किया गया था। आरोप है कि इसी दौरान नवनिर्वाचित सरपंच ललिता बौद्ध के साथ गांव के दबंग चंद्रप्रकाश उर्फ छोटू पटेल ने अपने साथियों के साथ पहुंचकर विवाद किया और मारपीट की। ग्राम सभा में अन्य लोग भी मौजूद थे जो कि बचाव करने आए तो उन्हें भी पीटा गया।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

पूरे मामले में नादन देहात थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर चार लोगों को हिरासत में लिया है। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस ने अन्य आरोपितों का नाम एफआइआर में न तो शामिल किया और न ही उनको गिरफ्तार किया है। वहीं पूरे मामले की जांच पुलिस ने शुरू कर दी है। सरपंच सहित गांव के दलितों की मांग है कि सभी लोगों का नाम एफआइआर में शामिल कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

इधर इस मामले में पुलिस की आई सफाई:

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नादन देहात पुलिस का कहना है कि घटनाक्रम के अनुसार सभी धाराएं लगाई गई हैं। घर मे घुस के मारपीट, सरकारी काम मे बाधा, गाली गलौज सहित एससी, एसटी एक्ट भी लगाया गया है। लेकिन इनमें सात साल से ज्यादा की सजा का प्राविधान नही है, लिहाजा न्यायालय के निर्देशानुसार आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती थी। इसके बाद भी आरोपितों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए धारा 151 लगाई गई, ताकि आरोपितों को गिरफ्तार करके मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा सके। इधर जब तहसीलदार कोर्ट में आरोपितों को पेश किया गया तो रात के सात बज चुके थे। इस समय रात को जेल नहीं भेज सकते थे न ही रात को थाने में रख सकते थे। ऐसे में छोड़ दिया गया।

जरियारी महिला सरपंच मामले में यह है विवाद की जड़:

मूल रूप से यह महिला सरपंच साकेत बताई जा रही है लेकिन इन्होंने खुद को ओबीसी बता कर चुनाव लड़ा और जीता। दरअसल इन्होंने बौद्ध धर्म अपना रखा है। कथित नियमानुसार अगर एससी द्वारा बौद्ध धर्म अपना लिया जाता है तो वह ओबीसी माना जाता है। इसको लेकर चुनाव के वक्त सरला साकेत ने ओबीसी के तौर पर चुनाव लड़ा। जरियारी पटेल बाहुल्य है और साकेत यहां तुलनात्मक रूप से कम हैं। फिर भी सरला साकेत चुनाव जीत गईं। यही कसक विवाद की वजह रही और बहुसंख्यक रूप से दबंगों ने महिला सरपंच से मारपीट कर अपनी मन कि भड़ास निकाली।

रैगांव विधायक कल्पना वर्मा भी सामने आई:

वहीं इस मामले में रैगांव से कांग्रेस विधायक कल्पना वर्मा ने भी मामले में आरोपितों को थाने से छोड़ने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि दलित महिला के साथ जिस तरीके से शासकीय कार्यक्रम के दौरान व्यवहार किया गया है वह न केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधि का अपमान है, बल्कि महिला समाज का अपमान है। ऐसे लोगो को तत्काल सलाखों के पीछे होना चाहिए, लेकिन उनपर रहम किया जा रहा। कल्पना वर्मा ने चेताया कि कल सुबह तक आरोपितों की गिरफ्तारी नही हुई तो उग्र महिला आंदोलन के लिए प्रशासन तैयार हो जाए।