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बिना रेरा और डायवर्शन के कृषि भूमि पर धड़ल्ले से बिक रहे महंगे प्लॉट, प्रशासन मौन!

हरदा। जिले के ग्राम कुकरावद-सुल्तानपुर में मुख्य मार्ग से लगी कृषि भूमि पर बिना रेरा पंजीयन और भूमि डायवर्शन के आवासीय प्लॉट बेचे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कॉलोनाइजरों द्वारा कृषि भूमि की प्लॉटिंग कर उसे आवासीय कॉलोनी के रूप में प्रचारित किया जा रहा है और महंगे दामों पर प्लॉटों की बुकिंग की जा रही है।

मौके पर कॉलोनी का कार्यालय संचालित किया जा रहा है, जहां प्रचार-प्रसार के लिए युवकों-युवतियों की टीम तैनात है। बड़े-बड़े होर्डिंग और बैनरों पर “आवासीय प्लॉट उपलब्ध”, “सीमित समय के लिए बुकिंग जारी” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया जा रहा है।

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 की टीम ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों से चर्चा की। कर्मचारियों ने दावा किया कि कॉलोनी को रेरा की अनुमति मिल चुकी है तथा यहां सड़क सहित अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। हालांकि, मौके पर रेरा पंजीयन या अन्य वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित भूमि का डायवर्शन नहीं हुआ है तथा रेरा पंजीयन भी उपलब्ध नहीं है, इसके बावजूद कृषि भूमि को आवासीय प्लॉट बताकर बिक्री की जा रही है। ऐसे मामलों में खरीदारों को भविष्य में रजिस्ट्री, निर्माण अनुमति और अन्य कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बिना आवश्यक अनुमतियों के प्लॉटिंग की जा रही है, तो राजस्व विभाग, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारी अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं?

साथ ही, पूरे क्षेत्र की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है कि आखिर कितने लोग कृषि भूमि पर कॉलोनियां विकसित कर प्लॉट बेच रहे हैं। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि शासन के किन नियमों और किस वैधानिक अनुमति के आधार पर कॉलोनी का नक्शा दिखाकर लोगों से प्लॉट की बुकिंग कराई जा रही है।

यदि संबंधित परियोजनाओं के पास रेरा पंजीयन, भूमि डायवर्शन, स्वीकृत लेआउट एवं अन्य आवश्यक अनुमतियां नहीं हैं, तो प्रशासन को तत्काल जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके और भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।