हरदा/रहटगांव हरदा जिले की रहटगांव तहसील के ग्राम नजरपुरा में प्रशासनिक लापरवाही का एक दर्दनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है। गांव का मुक्तिधाम पिछले करीब 9 वर्षों से टापू बना हुआ है और वहां तक पहुंचने के लिए कोई सुरक्षित मार्ग नहीं है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए शव यात्रा लेकर उफनती अजनाल नदी पार करनी पड़ रही है।
बुधवार को 53 वर्षीय महिला सीमा केवट के निधन के बाद ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर अर्थी को नदी के तेज बहाव से पार कराया और दूसरी ओर स्थित मुक्तिधाम तक पहुंचे। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक उदासीनता की पोल खोल दी है।
44.32 लाख की स्वीकृति, फिर भी नहीं बन रही पुलिया
ग्रामीणों के अनुसार, जनपद पंचायत टिमरनी द्वारा इस पुलिया निर्माण के लिए 44 लाख 32 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की जा चुकी है। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के अधिकारियों के अड़ियल रवैये के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी दिन कोई बड़ा हादसा होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिनों के भीतर पुलिया निर्माण को स्वीकृति देकर कार्य शुरू नहीं किया गया तो ग्रामीणों द्वारा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
वर्षों से शिकायतें, लेकिन समाधान नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। गांव के सरपंच ने बताया कि मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता भी उपलब्ध नहीं है।

