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सरकारी अनुदान के खाद-बीज की कालाबाजारी का आरोप, सरकारी सील लगी बोरियां मंडी में बिकती मिलीं

हरदा। सहकारिता विभाग द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) वर्ग के गरीब आदिवासी किसानों को अनुदान पर वितरित किए जाने वाले खाद-बीज की कथित कालाबाजारी का मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी योजना के तहत किसानों को मिलने वाला अनुदानित माल कृषि उपज मंडी हरदा में बिक्री के लिए पहुंच गया, जिसे एक व्यापारी द्वारा खरीदा भी गया।

जानकारी के अनुसार, हरदा कृषि उपज मंडी में सोयाबीन से भरी बोरियों पर सरकारी योजना से संबंधित नाम और सील लगी हुई थी। इसके बावजूद उक्त माल की नीलामी होने और खरीदे जाने को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 की टीम ने जब मंडी परिसर में इस माल को बिकते हुए देखा और वीडियो एवं फोटो बनाने का प्रयास किया, तो कथित तौर पर टीम को रोकने की कोशिश भी की गई।

मंडी के एक खरीददार व्यापारी लालू अग्रवाल (मंगल ट्रेडर्स) का कहना है कि उन्होंने यह माल मंडी की नियमित नीलामी प्रक्रिया के तहत खरीदा है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि जब बोरियों पर सरकारी सील और योजना का नाम स्पष्ट रूप से अंकित था, तब मंडी प्रशासन और खरीददारों ने इसकी वैधता की जांच क्यों नहीं की?

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, करताना क्षेत्र के एक किसान द्वारा एक लोडिंग वाहन में यह सरकारी माल भरकर हरदा मंडी लाया गया था। अब यह जांच का विषय है कि यह माल किस ग्राम पंचायत या किस ग्राम सेवक के माध्यम से संबंधित किसान तक पहुंचा और फिर मंडी तक कैसे आया।

यह भी मांग उठ रही है कि जिस वाहन से यह माल लाया गया, उसके चालक और माल बेचने वाले व्यक्ति से पूछताछ की जाए। इससे पूरे मामले का खुलासा हो सकता है और यदि कोई अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान सामने आ सकती है।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि कुछ स्थानों पर अनुदानित खाद-बीज का वितरण केवल कागजों में दर्शाकर वास्तविक लाभार्थियों तक सामग्री नहीं पहुंचाई जाती और बाद में इस सामग्री की अवैध बिक्री कर लाखों रुपये का खेल किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

अब सवाल यह है कि:

सरकारी सील लगी बोरियां मंडी तक कैसे पहुंचीं?

क्या यह अनुदानित सामग्री थी?

यदि हां, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

क्या मंडी प्रशासन और संबंधित विभाग इस पूरे मामले की जांच करेंगे?

जनहित में आवश्यक है कि जिला प्रशासन, सहकारिता विभाग और कृषि उपज मंडी प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।