पटवारियों का उग्र विरोध: 5 सूत्रीय मांगों पर 7 दिन का अल्टीमेटम, 15 जुलाई से तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश की चेतावनी
हरदा । मध्यप्रदेश शासन द्वारा पटवारी संवर्ग की वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण में हो रही लगातार देरी, पदोन्नति से वंचित रखने तथा सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान नहीं होने से प्रदेशभर का पटवारी संवर्ग आक्रोशित हो गया है। इसी के विरोध में मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रादेशिक आव्हान पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टरों के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन में शासन को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 15 जुलाई 2026 से 17 जुलाई 2026 तक प्रदेशभर के पटवारी तीन दिवसीय सामूहिक सांकेतिक अवकाश पर रहेंगे। इसके बाद चरणबद्ध एवं व्यापक आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
पटवारी संघ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष विकास जोशी का कहना है कि संगठन पिछले कई वर्षों से अपनी न्यायोचित मांगों को शासन के समक्ष विभिन्न माध्यमों से उठाता रहा है। संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मुख्यमंत्री निवास पर भेंट कर उन्हें पटवारी महाधिवेशन में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया था। मुख्यमंत्री द्वारा नवंबर 2025 में महाधिवेशन के लिए समय देने तथा तिथि पृथक से तय कर सूचित करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक न तो महाधिवेशन की तिथि घोषित की गई और न ही पटवारियों की लंबित मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया गया। इससे पूरे प्रदेश का पटवारी संवर्ग स्वयं को उपेक्षित एवं शोषित महसूस कर रहा है।
पटवारियों की प्रमुख 5 सूत्रीय मांगें
संघ ने ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग कैडर रिव्यू लागू करने, पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान की रखी है। संघ का कहना है कि कैडर रिव्यू का प्रस्ताव वर्षों से शासन स्तर पर लंबित है, जबकि अन्य विभागों के कर्मचारियों को लगातार पदोन्नति का लाभ दिया जा रहा है। इसके विपरीत पटवारी संवर्ग को पदोन्नति से वंचित रखा गया है, जो गंभीर भेदभाव का उदाहरण है। संघ ने मांग की है कि जब तक कैडर रिव्यू लागू नहीं होता, तब तक पटवारियों को पदोन्नति तथा पदोन्नति से वंचित कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाए।
दूसरी मांग नायब तहसीलदार की विभागीय परीक्षा शीघ्र आयोजित करने की है। संघ के अनुसार विगत 25 वर्षों में केवल एक बार वर्ष 2018 में परीक्षा आयोजित हुई थी। इसके बाद आज तक परीक्षा नहीं होने से योग्य पटवारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
तीसरी मांग जज प्रोटेक्शन एक्ट में पटवारियों को शामिल करने की है। संघ का कहना है कि राजस्व न्यायालयीन प्रकरणों में पटवारी केवल प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है, जबकि निर्णय तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार द्वारा लिया जाता है। इसके बावजूद कई मामलों में सीधे पटवारियों पर एफआईआर दर्ज कर दी जाती है, जो विधिसम्मत नहीं है। इसलिए उन्हें भी जज प्रोटेक्शन एक्ट का संरक्षण प्रदान किया जाए।
चौथी मांग वर्षों से लंबित वित्तीय भुगतान से संबंधित है। संघ ने बताया कि प्रदेश के अनेक जिलों में पटवारियों ने स्वामित्व योजना, कृषि संगणना, लघु सिंचाई संगणना, फार्मर आईडी शिविर सहित कई योजनाओं में अपने निजी संसाधनों से कार्य किया, लेकिन आज तक उनका मानदेय भुगतान नहीं हुआ। यदि लंबित भुगतान शीघ्र नहीं किया गया तो भविष्य की योजनाओं के कार्यों का बहिष्कार करने की चेतावनी भी दी गई है।
पांचवीं मांग पटवारी संघ के पदाधिकारियों के नियम विरुद्ध स्थानांतरण निरस्त करने की है। संघ का आरोप है कि कर्मचारी हितों की आवाज उठाने वाले पदाधिकारियों को प्रताड़ित करने की मंशा से स्थानांतरण नीति के विपरीत स्थानांतरित किया गया है। जबकि शासन की स्थानांतरण नीति में मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को स्थानांतरण में छूट का प्रावधान है। संघ ने ऐसे सभी स्थानांतरण तत्काल निरस्त करने तथा नियमित परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित करने की भी मांग की है।
7 दिन का अल्टीमेटम, फिर आंदोलन
ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि यदि सात दिनों के भीतर शासन द्वारा पांचों मांगों के संबंध में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 15 जुलाई से 17 जुलाई 2026 तक प्रदेशभर के पटवारी सामूहिक अवकाश लेकर सांकेतिक आंदोलन करेंगे। इसके बाद आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
शासन पर पटवारी संवर्ग से लगाया भेदभाव का आरोप
मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रदेश संवाद समिति अध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि प्रदेश शासन द्वारा लगातार पटवारी संवर्ग के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। अन्य विभागों में पदोन्नतियां जारी हैं, जबकि पटवारियों को वर्षों से पदोन्नति से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के सभी जिला मुख्यालयों पर पटवारियों ने एकजुट होकर ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया है। यदि शासन ने समय रहते न्यायोचित मांगों का समाधान नहीं किया तो प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
पटवारी संघ का कहना है कि उसका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित न्यायोचित मांगों का समाधान है। संगठन को उम्मीद है कि शासन संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेश के हजारों पटवारियों को राहत प्रदान करेगा।
इस दौरान पटवारी अनुराग कारोलिया, सुनील शर्मा, शिवनारायण बघेल, संतोष गौर, फूलसिंह उईके, सुभाष मर्सकोले,
राज नारायण बट्टी, मूरत चौहान, सुशील दुबे, राघवेंद्र परमार, विजय कौशल, सुनील गौर, हर्षिता कौशल, अलकनंदा ठाकुर, उमा चंदेरी आदि उपस्थित रहे ।

