करोड़ो का व्यापार करने वाली फैक्ट्री में नही लगा है बोर्ड
सीमेंट पोल फैक्ट्री नाले की जमीन का कर रहे उपयोग,
फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीले पानी से मवेशियो की जान को खतरा
मकड़ाई समाचार हरदा।जिले में कई प्रकार लघु और मध्यम वर्ग के उद्योग धंधे संचालित है।जिनके लिए सरकार द्वारी जारी गाईडलाइन का पालन करना जरुरी होता है। हर काम का लेखा जोखा और आय-व्यय और करो के भुगतान में पारदर्शिता अनिवार्य है।इसके बाद भी कई ऐसे उद्योग आज भी जिले में संचालित किए जा रहे है।जो शासन की गाईडलाईन को धता बता रहे है। अपने चंद रुपयो के लालच में प्रकृति और पर्यावरण प्रदुषित करते हुए जनजीवन को खतरे में डालने का काम कर रहे है।वहीं इन पर मेहरबान सरकारी अधिकारी कर्मचारियों के कारण इनके हौसले बुलंद है।
सरकारी जमीन का निजी उपयोग से राजस्व को लग रहा चूना -जिले के टिमरनी विकासखंड की ग्राम पंचायत सौंताड़ा के निमाचा कला से लगी हुई सीमेंट पोल फैक्ट्री है।जहां जब मकड़ाई समाचार टीम ने पड़ताल की तो देखा गया कि वहां पर 8 मजदूर काम करते पाए गए।मजदूरों ने बताया कि यह राजेश अग्रवाल की है।यहां पर सीमेंट रेत कांक्रीट से सीमेंट पोल बनाने कार्य चल रहा है।फैक्ट्री का व मटेरियल नाले के साथ लगी सरकारी जमीन पर फैला हुआ था। सरकारी जमीन पर निजी कार्यो के लिए उपयोग में नही ली जा सकती है।इस प्रकार अगर कोई जमीन उपयोग करना हो तो स्थानीय प्रशासन से परमिशन ली जाती है।इसके बाद ही तय समय तक उसका उपयोग किया जा सकता हैं।जिसके बदले में सरकार को राजस्व चुकाना होता है मगर यहां पर ऐसा कुछ नही है।राजस्व के अधिकारियों की मेहरबानी के चलते यह कार्य बदस्तूर जारी है। जिससे सरकार को मिलने वाले राजस्व का चूना लगाया जा रहा है।
कोरोना संकटकाल में ऐतिहात नही,सूरक्षा के उपाए शून्य– आज पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है और प्रशासन द्वारा इसे रोकने के तमाम प्रयास किए जा रहे कि संक्रमण किसी प्रकार से न फैले इसके लिए सरकार द्वारा गाईडलाईन भी जारी कि गई है।जिसको फालो करना अनिवार्य हैं।इसके साथ अगर कोई संस्था आफिस फैक्ट्री है उसके संचालक की जबाबदारी और भी ज्याद बढ़ जाती है ताकि कोरोना के संक्रमण से बचाव के सारे उपाए किए जाए और सावधानी बरती जाए।मगर यहां पोल फैक्ट्री में कियी प्रकार से संक्रमण से बचने के कोई उपाए नही किए जा रहे है। फैक्ट्री में कहीं पर भी सेनेटाईजर नही है।मजदूर व अन्य कर्मचारियों के चेहरे पर मास्क भी नही है।सोशल डिस्टंेस का पालन भी इनके लिए कोई मायने नही रखता है।
मजदूरो के लिए नही है सुरक्षा सामग्री – शासन की गाईडलाईन केे अनुसार फैक्ट्री या कारखानों में जोखिमपूर्ण कार्य करने वाले मजदूरों को सिर पर हेलमेट हाथ दस्ताने और पैरो में लांग बूट पहनना जरुरी है साथ ही आपात कालीन स्थिति में निपटने केे लिए अग्निशामक यंत्र का होना बहुत जरुरी होता है। लेकिन फैक्ट्री संचालक को मजदूरो की जान से कोई लेना देना नही है। इसके अलावा फैक्ट्री के चारो और सुरक्षा की दृष्टि से तार फैसिंग या बाउड्री वाल का होना जरुरी होता है।लेकिन यहां की फैक्ट्री में सब भगवान भरोसे चल रहा है। फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर ने बताया कि पोल को पकाने वाले पानी को चार पंांच महिने मं निकालकर पास के नाले में छोड़ देते है। ज्ञात हो कि उक्त नाला और उसके आस पास राजस्व की भूमि लगी हुई है साथ ही आस पास के किसानों के मवेशी भी वर्ष के 12 महिने इसी नाले के पानी से अपनी प्यास बुझाते है।जिससे मवेशी और मजदूरो की जान पर खतरा बना हुआ है।
खतरनाक रसायनिक पदार्थ के उपयोग का सूचना बोर्ड भी नही है – फैक्ट्री के चारो ओर न तो बाउंड्री वाल और न ही कहीं बोर्ड लगा है। करोड़ो का व्यापार करने वाली इस फैक्ट्री के मालिक द्वारा लगता है कि सादे कागज कच्च्ेा बिलो में ही सीमेंट पोल की बिक्री लंबे समय से की जा रही है। जिससे सरकारी टैक्स की चोरी खुले आम दिखाई दे रही है। इसके साथ ही बालश्रम कानून अंतर्गत यहां पर कोई बोर्ड नही लगा है।इसका बोर्ड भी नही है।फैक्ट्री में बनने वाले उत्पाद की डिटेल व उसके उपयोग में रखी जाने वाली सावधानी के बारे में कोई सूचनात्मक जानकारी चस्पा नही की गई है। जबकि यह सबसे ज्यादा जरुरी होता है। सीमेंट एक रसायनिक पदार्थ है जिसके उपयोग के दौरान सावधानी रखी जानी आवश्यक है।इसके लिए कारखाना उत्पाद संबधित जानकारी प्रमुख स्थान पर चस्पा होना जरुरी है।
फैक्टी का अवशेष नाले में जाने से मवेशी मरने की संभावना- इस सीमेंट पोल फैक्ट्री के करीब से एक नाला बहता है।इन्होने अपना काम व सामान का फैलाव नाले तक कर लिया है।जिससे यह लोग नाले से लगी सरकारी जमीन का भी मनमाना उपयोग कर रहेे है।सीमेंट पोल बनने के बाद उससे बचा सीमेंट माल व पानी आदि सीधें नाले में बहाया जाता है।यही सीमेंट वाला पानी और अवशेष नाले के पानी में मिलकर उसे जहरीला बना रहे है।इस पानी को पीने वाली मवेशियों की जान खतरे में आ सकती है।सीमेंट के पानी पीने से मवेशियों को गलधोंटू जैसी बिमारी हो सकती है।जिसमें सीमेंट गले जमने दम घुटकर मरने का खतरा बन सकता है।ठसके साथ आस पास अन्य जीव जंतु और पक्षी भी मृत हो सकते है।इस संबंध में उचित कार्यवाही आवश्यक हैं अगर यह नाला आस पास के किसी क्षेत्र में पेयजल के स्त्रोत से मिलेगा वहां के लोगो को कई प्रकार की बिमारियां दे सकता है।
इनका कहना है – आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है जिसे में जल्द दिखवाती हूं और जांच की जायेगी अनियमितता लापरवाही पाए जाने पर कार्यवाही की जायेगी। …अंकिता त्रिपाठी एसडीएम टिमरनी



