jhankar
ब्रेकिंग
किराए के एक कमरे से शुरू हुआ सपना, आज 250 बच्चों का भविष्य संवार रहा है 'आकाश गंगा स्कूल' सिवनी मालवा में छत पर फंसे नंदी का सफल रेस्क्यू, नागरिकों की मदद से सुरक्षित उतारा गया हंडिया में रविवार को 5 घंटे रहेगा बिजली शटडाउन, 33 केवी लाइन मेंटेनेंस के चलते बंद रहेंगे सभी 11 केव... मकान की छत पर चढ़ा नंदी, घंटों तक नीचे उतारने में जुटे रहे लोग मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में प्रतिभाओं का हुआ सम्मान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने किया स्वास्थ्य केन्द्रो का निरीक्षण विश्व जनसंख्या दिवस पर जन-जागरूकता रैली सम्पन्न टिमरनी के वार्ड क्रमांक 1 व 2 की उचित मूल्य की दुकान के लिए आवेदन आमंत्रित RTO ई-चालान के नाम पर .APK फाइल भेजकर बैंक खाते साफ कर रहे साइबर ठग: राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ... हरदा जिला एक नजर में..।

ओंकारेश्वर में बारस व धनतेरस पर्व में भक्तों का कुबेरेश्वर महादेव के दर्शन हेतु उमड़ेगा जनसैलाब 

सुनील पटल्या गुर्जर बेड़िया खरगोन । श्री कुबेर भंडारी मंदिर ओम्कारेश्वर में धनतेरस के पावन पर्व पर पवित्र नर्मदाजी के तट पर कुबेर भगवान की तपोभूमि पर स्थित श्री कुबेर भंडारी मंदिर में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी विशेष आयोजन होगा। मंदिर के अध्यक्ष किशोर बिरला, कार्यकारी सदस्य कोमलसिंह मंडलोई, नारायण मंडलोई द्वारा बताया कि 21 अक्टूबर शाम 7 बजे से दीपदान व सत्यनारायण कथा और भजन निशा 22 अक्टूबर धनतेरस को प्रातः 4 बजे श्री कुबेरेश्वर महादेवजी का महाभिषेक, माँ नर्मदा एवं गंगा पूजन प्रातः 6 बजे से 108 कुण्डिय श्री कुबेर लक्ष्मी महायज्ञ 9 बजे यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद महाआरती होगी और भंडारा होगा। इस महायज्ञ के फलस्वरूप कुबेर सिद्धि नि:शुल्क के रुप में दी जाएगी,जो श्रद्धालु इस कुबेर सिद्धि को अपने घर या भंडार में पूजन विधि से रखते है उनके यहाँ धन-धान्य की वृद्धि होती है। इस विशाल कार्यक्रम का हजारों कुबेर भक्त महायज्ञ व भंडारे का लाभ लेते है, इस अवसर पर क्षेत्रिय सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पंचायत ओंकारेश्वर एवं क्षेत्रिय जनप्रतिनिधिगण पधारकर महायज्ञ मे आहुति प्रदान करते है व भोजन प्रसादी ग्रहण करते है।
                  उल्लेखनीय है कि धन के देवता कुबेर ने नर्मदा-कावेरी के संगम के पास नर्मदा तट पर तपस्या की थी उसी स्थान पर कुबेर भंडारी नामक प्राचीन मंदिर स्थित था ओम्कारेश्वर बाँध के बनने के बाद वह प्राचीन मंदिर जलमग्न हो गया उसके स्थान पर बाँध के पास ही ओम्कारेश्वर के ब्रम्हपुरी क्षेत्र में नये मंदिर का निर्माण श्री चेतरामजी चौधरी (गुर्जर दादा) के द्वारा किया गया था।