मकड़ाई एक्सप्रेस 24 इंदौर। पति पत्नि के विवाद में बरेली की एसडीएम ज्योति मोर्या का मामला अभी चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसमें ज्योति मोर्या ने एसडीएम बनने के बाद पति को छोड़ दिया। पति आलोक मोर्या का दावा है कि वह किसी अफसर के साथ रिलेशन में आ गई हैं। अब ऐसा ही एक मामला देवास से आया है , लेकिन यहां पीड़ित पति नहीं पत्नी है।
पत्नि नेे बर्तन मांजकर पति कोे पढ़ाया
पत्नि नेे अपने पति को पढ़ाई केे लिए लोगो केे घरोे में बर्तन मांजकर कमाए रुपये उन्हे दिए। जब पति कमर्शियल टैक्स अधिकारी बन गया तो अपनी पहली पत्नि कोेे भूलाकर दूसरी अन्य महिला से शादी कर ली। पति पत्नि दोनो आदिवासी समुदाय सेे आते है।
पत्नी ने बेराजगार पति की पढ़ाई लिए खर्च की ली जिम्मेदारी
जिले के बेहरी क्षेत्र के आरिया गांव की ममता का जोबट अलीराजपुर निवासी कमरू पुत्र नगर सिंह से प्रेम.प्रसंग था। 2015 में दोनों ने कोर्ट मैरिज की। कमरू स्नातक उत्तीर्ण था लेकिन उसके पास नौकरी या रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं थी। ममता ने उसे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए कहा। कमरू ने प्रतियोगिता परीक्षाओं के फार्म और किताबों आदि पर खर्च होने वाली राशि की बात कही तो ममता ने यह जिम्मा उठाया।
ममता ने दूसरों के घरों में साफ.सफाई की बर्तन मांजे और दुकानों पर काम कर पति के लिए किताबें.नोट्स मंगवाएं, जिससे वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी सके। पत्नि ने अपनेे पति की पढ़ाई के लिए मेहनत मजदूरी कर रुपयेे जुुटाए आखिर प्रेेमविवाह किया था पति केे प्र्रति सर्मपण जो था। दोेनोे की मेेहनत रंग लाई और आखिरकार 2019 -20 में कमरू को सफलता मिली और कमर्शियल टैक्स अफसर के पद पर उसका चयन हुआ।उनकी पोेस्टिंग रतलाम जिले में हुई। जहां कमरु की पहचान जोबट निवासी युवती सेे हुई। बाद मेे उसने पहली पत्नि ममता को मायके भेज कर युवती के साथ रहने लगा।इस बारेे में ममता नेे बताया कि उक्त युवती केे पहले पति का निधन हो गया था। उसके बाद वह कमरू के संपर्क में आई थी। करीब छह साल दोनों साथ रहे।
कोर्ट में स्वीकारा ममता मेरी पत्नी है
ममता के वकील सूर्यप्रकाश गुप्ता का कहना है कि दायर वाद की सुनवाई के दौरान पति ने कोर्ट में स्वीकार किया था कि ममता मेरी पत्नी है और इसे साथ रखूंगा। नहीं रखने पर 12 हजार रुपए प्रतिमाह देने की बात भी कही थी लेकिन अब वह इससे भी इनकार करने लगा है।

