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भारत को चीन की तरह विरोधी मानना अमेरिका के लिए होगी बड़ी भूल

वाशिंगटन। अमेरिका की ट्रंप सरकार की नीतियों की अब देश में ही कड़ी आलोचना होने लगी है। ट्रंप ने रूस से तेल इंपोर्ट करने के चलते भारत के खिलाफ एक्श न लिया है, वहीं चीन अभी भी मौज काट रहा है। बता दें चीन भारत के मुकाबले रूस से कहीं ज्याहदा पेट्रोलियम प्रोडक्ट्सा का इंपोर्ट करता है। उसी तेल को रिफाइन कर यूरोपीय बाजार में बेचता भी है। अब यूएन में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्कीा हेली ने ट्रंप की इस नीति की कड़ी आलोचना की है।

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक लेख में उन्होंटने लिखा कि चार दशक बाद अमेरिका-भारत का संबंध एक अहम मोड़ पर खड़ा है। हेली ने अपने लेख में लिखा कि ट्रंप सरकार की विदेश नीति के दो प्रमुख लक्ष्य हासिल करने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है। इसके बावजूद हालिया घटनाक्रमों ने अमेरिका-भारत रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया है। उन्होंकने लिखा- पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका की ट्रंप सरकार ने भारत को रूसी तेल की खरीद पर 25 फीसदी टैरिफ की धमकी दी है। यह कदम पहले से ही भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25 फीसदी शुल्क के बाद आया है। यह तनाव उस समय और गहरा गया जब अमेरिका की भूमिका भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम वार्ता में सवालों के घेरे में आई।

ट्रंप का कहना है कि भारत की रूसी तेल पर निर्भरता पुतिन के यूक्रेन युद्ध को मदद पहुंचा रही है। साथ ही भारत लंबे समय से एक ‘प्रोटेक्शनिस्ट इकॉनमी’ यानी संरक्षणवादी अर्थव्यवस्था रहा है, जिसकी औसत टैरिफ दर अमेरिका से पांच गुना ज्यादा बताई गई। हेली ने कहा कि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को चीन की तरह विरोधी मानना एक बड़ी भूल होगी। चीन जहां रूस से तेल आयात जारी रखे हुए है और अब तक किसी बड़े प्रतिबंध का सामना नहीं कर रहा है, वहीं भारत को दंडित करना अमेरिका की एशिया रणनीति को कमजोर कर सकता है।