उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में अब प्रोटोकॉल (वीआईपी) दर्शन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व तकनीकी रूप से सशक्त बनाया गया है। मंदिर प्रशासन ने अब ऐसी व्यवस्था लागू की है, जिसमें मंदिर आने वाले हर वीआईपी श्रद्धालु पर रियल टाइम (Live) निगरानी रखी जा रही है।
इस नई प्रणाली की शुरुआत मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के निर्देशन में की गई है। इसका उद्देश्य दर्शन व्यवस्था में पारदर्शिता लाना, अवैध एंट्री और अनियमितताओं पर रोक लगाना है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि विशेष अनुमति के तहत आने वाले श्रद्धालु ही प्रोटोकॉल सुविधा का लाभ लें।
कैसे काम करेगी नई लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम
अब जब कोई वीआईपी श्रद्धालु महाकाल मंदिर दर्शन के लिए आता है, तो शंख द्वार पर तैनात दो कर्मचारी उसकी पूरी जानकारी ऑनलाइन गूगल डॉक्स में दर्ज करते हैं। इसमें श्रद्धालु का नाम और पद, मंदिर में आने का समय, किस गेट से प्रवेश किया, दर्शन में लगा समय, साथ में आए लोगों की संख्या, किसने प्रोटोकॉल दर्शन के लिए अनुशंसा की, रिसीव करने वाला कर्मचारी कौन था, ये सारी जानकारी सीधे प्रशासक प्रथम कौशिक और सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया के मोबाइल पर लाइव अपडेट होती है।
प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि दिनभर में जितने भी प्रोटोकॉल श्रद्धालु दर्शन करते हैं, उनकी पूरी गतिविधि अब रिकॉर्ड में रखी जा रही है। यह व्यवस्था अक्टूबर के पहले सप्ताह से लागू की गई है, और शुरुआती परिणाम काफी सकारात्मक हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और कर्मचारियों की जवाबदेही तय हुई है।
क्यों पड़ी इस तकनीकी व्यवस्था की जरूरत?
महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इनमें जनप्रतिनिधि, न्यायिक अधिकारी, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी, फिल्मी हस्तियां तथा अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल रहते हैं। इनमें से कई लोगों को प्रोटोकॉल दर्शन की अनुमति दी जाती है। इसके लिए प्रति व्यक्ति RS 250 का दान मंदिर समिति में जमा करना अनिवार्य है। पिछले वर्ष इस व्यवस्था में कई अनियमितताएं उजागर हुई थीं। जांच में पाया गया कि कुछ मामलों मेंश्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाकर दिखाई गई। इसके अलावा अवैध एंट्री कराई गई और रुपये के लेन-देन के आरोप मंदिर कर्मचारियों पर लगे। इन गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए मंदिर प्रशासन ने अब पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन और रियल-टाइम निगरानी से जोड़ने का निर्णय लिया।

