शाजापुर में शेयर मार्केट ठगी का भंडाफोड़
_शेयर मार्किट मे प्रदेश मे लोगो को रकम दुगुना चारगुना करने का लालच देकर लोगो से रुपया लेने वाले फर्जी काल सेन्टर पर साइबर सेल ने कार्रवाई कर 19 लोगो को गिरफ्तार किया।पढिये पूरी खबर विस्तार से…._
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 शाजापुर। शेयर बाजार में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर लोगों से रकम ऐंठने वाले एक संगठित साइबर फ्रॉड गिरोह का शाजापुर में भंडाफोड़ हुआ है। राज्य साइबर सेल शाखा उज्जैन ने गुरुवार को गिरवर रोड स्थित एक किराए के मकान पर छापा मारकर इस फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया।
टीम ने मौके से 13 युवतियों सहित कुल 19 लोगों को गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए उज्जैन भेज दिया। छापेमारी के दौरान भारी पुलिस बल भी मौजूद रहा। मौके से कई कंप्यूटर सिस्टम, मोबाइल फोन, बड़ी संख्या में सिम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं।
कैसे चलता था फर्जी कॉल सेंटर
साइबर सेल डीएसपी लीना मारोठ के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क एक कॉल सेंटर की तरह काम करता था। आरोपी लोगों को शेयर मार्केट में भारी मुनाफा दिलाने का लालच देते थे और फिर उनकी निवेश राशि फर्जी खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। जांच में सामने आया कि इस रैकेट को चलाने में साहिल मंसूरी और फईम गौरी की मुख्य भूमिका थी। गिरफ्तार लोगों में अमन खान, सोहेल मंसूरी, साहिल मंसूरी, फहीम गौरी, रेहान गौरी, फैजान खान और 13 युवतियाँ शामिल हैं। सभी आरोपी शाजापुर जिले के ही रहने वाले बताए गए हैं।
फरवरी से सक्रिय था ठगी का जाल
प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरवर रोड के इस मकान में फरवरी से कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। इससे पहले यह सेटअप सोमवारिया क्षेत्र में सक्रिय था। मुख्य आरोपी साहिल और फईम ही फर्जी सिमकार्ड, बैंक खाते और पैसों के ट्रांसफर की पूरी व्यवस्था करते थे। जैसे ही कार्रवाई की खबर फैली, बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और आरोपी कर्मचारियों के परिजन मौके पर एकत्र हो गए।
स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
छापेमारी की जानकारी स्थानीय पुलिस को दी गई थी, लेकिन इस कार्रवाई में उसकी प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं दिखी। महीनों से इतने बड़े पैमाने पर ठगी का रैकेट शहर में चलता रहा और स्थानीय पुलिस को भनक तक न लगना, उसकी कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े करता है।
साइबर सेल की गहन जांच जारी
साइबर सेल अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है, ताकि ठगी में शामिल सभी कड़ियों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि कई और खातों, नंबरों और लिंक की पहचान की जा रही है, जिससे रैकेट का दायरा और बड़ा निकल सकता है।

