संविधान किताबों में, जेसीबी ज़मीन पर—हंडिया से उठता बड़ा सवाल, आखिर किसके इशारे पर चल रही जेसीबी,,,,,
हंडिया।तहसील हंडिया के ग्राम हीरापुर में अगर कानून ढूंढना है तो शायद जेसीबी की खुदाई में दब गया होगा। यहां राजनीतिक संरक्षण प्राप्त दबंगों ने एससी/एसटी समुदाय के किसानों के खेतों तक जाने वाले मुख्य रास्ते को जेसीबी से खोदकर पूरी तरह बंद कर दिया, और प्रशासन आंख मूंदकर बैठा है।
यह वही रास्ता है जिससे ग्राम हीरापुर से भादुगांव और गोया होते हुए किसान वर्षों से खेतों तक आते-जाते रहे हैं। लेकिन दबंगों ने अपनी ताकत दिखाते हुए दिनदहाड़े जेसीबी चलवाई, रास्ता उखाड़ दिया और कमजोर किसानों की आवाजाही पूरी तरह ठप कर दी।
सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह है कि 23 दिसंबर 2025 को ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने तहसीलदार हंडिया को लिखित शिकायत दी थी, इसके बावजूद 15 दिन बाद भी न तो रास्ता खुला, न दोषियों पर कार्रवाई हुई। यह चुप्पी प्रशासनिक लापरवाही है या राजनीतिक दबाव—यह अब जनता जानना चाहती है।
रास्ता बंद होने से एससी/एसटी किसानों की खेती चौपट होने की कगार पर है। खेतों तक ट्रैक्टर, बैलगाड़ी तो दूर, पैदल जाना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की यह निष्क्रियता सामाजिक तनाव को बढ़ावा दे रही है और किसी भी समय हालात बिगड़ सकते हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी भरे स्वर में मांग की है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
अब देखना यह होगा कि तहसील प्रशासन इस संवेदनशील मामले में कब तक हस्तक्षेप कर एससी/एसटी किसानों एवं ग्रामीणों को न्याय दिलाता है या फिर दबंगों के आगे व्यवस्था यूं ही नतमस्तक बनी रहेगी।

