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MP High Court: “जहर बन चुका है नालों का पानी; सीवेज से उगाई जा रही सब्जियों पर हाईकोर्ट सख्त*

_*आमजन के सेहत से जुड़ी एक बेहद गंभीर खबर है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पेश की गई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की रिपोर्ट ।जो हरी सब्जी आप खा रहे उन्हे सींचने वाले गंदे पानी काली सच्चाई।रिपोर्ट ने शहर के नालों और उनमें उगाई जा रही सब्जियों की डरावनी सच्चाई उजागर की है।पढियेगा पूरी खबर विस्तार से…..*_

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 जबलपुर/भोपाल। मध्यप्रदेश में गंदे नालों के पानी से सब्जियां उगाने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPPCB) द्वारा पेश की गई हालिया जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसके बाद कोर्ट ने सरकार को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

प्रदूषण बोर्ड का खुलासा: सिंचाई और पीने योग्य नहीं है पानी

हाईकोर्ट में पेश की गई विस्तृत रिपोर्ट में बोर्ड ने बताया कि शहर के लगभग सभी प्रमुख नालों के पानी में सीवेज (मल-मूत्र) की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुँच चुकी है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं.

अत्यंत दूषित जल

नालों का पानी न केवल पीने, बल्कि सिंचाई और रोजमर्रा के कार्यों (निस्तार) के लिए भी पूरी तरह अनुपयोगी है।

स्वास्थ्य के लिए खतरा

इस पानी से उगाई जाने वाली सब्जियां मानव जीवन के लिए “धीमा जहर” साबित हो रही हैं।

वाटर पाइपलाइन पर संकट

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यदि यह दूषित पानी किसी भी तरह शहर की पेयजल पाइपलाइन में मिल जाता है, तो यह एक महामारी जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।

हाईकोर्ट के सख्त निर्देश

सीवेज को नालों में मिलने से रोकें ।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार और स्थानीय निकायों को स्पष्ट आदेश दिए हैं। डायरेक्ट डिस्चार्ज पर रोक को लेकर कहा कि घरों और बस्तियों से निकलने वाले सीवेज को सीधे नालों में मिलने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़ाव

शहर की सीवेज लाइनों को तत्काल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जोड़ा जाए ताकि गंदा पानी शोधित होकर ही बाहर निकले। कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिए गए सुझावों पर तत्काल अमल करने और उसकी प्रगति रिपोर्ट अगली सुनवाई तक पेश करने को कहा है।

“सीवेज वाले पानी से सब्जी उगाना जनता की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” — हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी

अगली सुनवाई 2 फरवरी को

इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 2 फरवरी, 2026 को तय की गई है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यदि अगली तारीख तक संतोषजनक कदम नहीं उठाए गए, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

आपकी सुरक्षाआपके हाथो में

यह रिपोर्ट शहरवासियों के लिए एक चेतावनी है। विशेषज्ञों की सलाह है कि बाजार से सब्जियां खरीदते समय सावधानी बरतें और उन्हें अच्छी तरह धोकर ही उपयोग करें।