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भोपाल के स्लॉटर हाउस में गोमांस काटकर विदेशों में हो रहा था सप्लाई

भोपाल। राजधानी भोपाल के स्लॉटर हाउस में जो गोमांस काटा गया था, वो विदेशों में सप्लाई किया जा रहा था। चाइना में गाय की हड्डियों की तस्करी की जा रही थी। नगर निगम के स्लॉटर हाउस में गाय के मांस की पैकिंग हो रही थी। ये तब हो रहा था, जब मध्य प्रदेश में साल 2004 से गोमांस पर पूरी तरह बैन है। ना कोई गोमांस बेच सकता है, ना उसका स्टॉक रख सकता है और ना उसकी तस्करी कर सकता है। लेकिन मध्य प्रदेश की राजधानी में ये सब हो रहा था।

26 टन गोमांस पकड़ा गया था

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17 दिसंबर 2025 को भोपाल में 26 टन गोमांस पकड़ा गया था। ये गोमांस नगर निगम के स्लॉटर हाउस से मुंबई भेजा जा रहा था, जैसे ही 26 टन गोमांस पकड़ा गया तो नगर निगम ने हाथ खड़े कर लिए। निगम ने कहा कि स्लॉटर हाउस तो हमारा है, लेकिन ठेका प्राइवेट कंपनी के पास है। गोमांस की तस्करी में दो आरोपी पकड़े गए थे। पहला था असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा और दूसरा था ड्राइवर शोएब। अब जैसे ही बवाल बढ़ा तो 22 जनवरी को SIT ने इन दोनों को रिमांड पर ले लिया। इनसे SIT की पूछताछ में पता चला कि असलम का कारोबार विदेशों तक फैला हुआ है। चाइना में भी असलम का नेटवर्क है। असलम ने पुलिस को बताया कि उसका माल कंटेनर में भरकर पहले मुंबई जाता था, फिर वहां से अरब देशों में सप्लाई होता था।

मांस अरब देशों में, और हड्डियां चाइना भेजी जाती थीं

गोमांस की सप्लाई भी दो तरीके से होती थी। मांस अरब देशों में सप्लाई होता था और हड्डियां चाइना भेजी जाती थीं। असलम चमड़ा एक फूड प्रोसेसिंग कंपनी भी चलाता था। ये कंपनी आगरा में है और इस कंपनी का नाम लाइव स्टॉक फूड प्रोसेसर लिमिटिड है। ये कंपनी मीट सप्लाई का काम करती है। असलम चमड़ा इसका डायरेक्टर है और इसी असलम चमड़ा को निगम ने 20 साल के लिए स्लॉटर हाउस का काम दिया था। इस ट्रक के ड्राइवर शोएब से भी SIT ने पूछताछ की है। शोएब ने बताया कि उसे एक बार माल ले जाने के 15 से 20 हजार रुपये मिलते थे। ट्रक के अंदर जो माल होता था, उसके बारे में वो कुछ नहीं जानता। वो तो बस सामान को लाता-ले जाता था। अब सबसे बड़ी बात स्लॉटर हाउस तो निगम के पास था। निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी ने कंटेनर मुंबई भेजने के लिए पत्र भी जारी किया था। मांस को स्लॉटर हाउस से बाहर ले जाने की अनुमति भी निगम की तरफ से मिली थी। एक और बात स्लॉटर हाउस शुरू करने की अनुमति भी MIC ने दी थी. ये प्रस्ताव परिषद में भी नहीं लाया गया और बिना किसी बातचीत के स्लॉटर हाउस खोल दिया गया।