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मिंग माफिया परिवार के 11 लोगों को चीन ने दी फांसी

बीजिंग। चीन ने म्यांमार के कुख्यात मिंग माफिया परिवार के 11 लोगों को फांसी दे दी। यह वही गैंग है जो इंटरनेट पर फर्जी रोमांस, क्रिप्टोकरेंसी ठगी, ऑनलाइन स्कैम और इंसानी गुलामी जैसे संगीन अपराधों के लिए बदनाम था। इस गिरोह के सदस्य लोगों को पहले ऑनलाइन प्रेम जाल में फंसाते थे, फिर उन्हें धोखाधड़ी, वेश्यावृत्ति और जबरन मजदूरी जैसे अवैध कामों में धकेल देते थे। चीन की कोर्ट ने इन सभी को सितंबर में मौत की सजा सुनाई थी और गुरुवार को सजा को अमलीजामा पहनाया गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मिंग परिवार के सदस्यों को ‘हत्या, मारपीट, गैरकानूनी हिरासत, धोखाधड़ी और अवैध कैसीनो संचालन’ जैसे अपराधों के लिए दोषी पाया गया था। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह गैंग अब तक कम से कम 14 चीनी नागरिकों की हत्या कर चुका था और कई लोगों को अपाहिज बना दिया था। म्यांमार के लाउकैंग क्षेत्र में इनका नेटवर्क अत्यंत क्रूर तरीके से चलता था, जहां पीड़ितों को जबरन बंदी बनाकर उनसे ठगी करवाई जाती थी। मिंग माफिया का तरीका बेहद खतरनाक था। यह लोग ‘लव स्कैम’ के जरिए लोगों को प्रेमजाल में फंसाते, फिर उन्हें क्रिप्टो निवेश के नाम पर लूटते थे। यदि कोई उनके लिए काम करने से इंकार करता, तो उन्हें कैद कर बिजली के झटकों और बर्बर यातनाओं से तोड़ा जाता था।

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इस गैंग का सरगना चेन झी ब्रिटेन में आलीशान जिंदगी जी रहा था। लंदन के पॉश इलाके एवेन्यू रोड पर उसकी करोड़ों की हवेली थी, साथ ही कई महंगी कमर्शियल बिल्डिंग्स और फ्लैट्स भी उसके नाम थे। ब्रिटिश सरकार ने उसके सभी ठिकानों को जब्त कर लिया है ताकि आपराधिक कमाई को खत्म किया जा सके। इस प्रकार के माफिया नेटवर्क भारत तक भी पहुंच चुका है। म्यांमार और कंबोडिया में चल रहे कई ‘डिजिटल गुलामी’ केंद्रों में अब तक 70 से ज्यादा भारतीय फंस चुके हैं। हाल ही में भारत सरकार ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया है। 6 नवंबर 2025 को भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों ने 270 भारतीयों को थाईलैंड के रास्ते बचाया था। इससे पहले मार्च 2025 में भी 549 भारतीयों को म्यांमार-थाईलैंड सीमा से सुरक्षित निकाला था।

रिपोर्ट के मुताबिक अक्सर युवाओं को ‘आईटी जॉब’ का झांसा देकर थाईलैंड बुलाया जाता है और फिर किडनैप कर म्यांमार ले जाया जाता है। वहां उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं और उन्हें ‘पिग बुचरिंग’ जैसे ऑनलाइन स्कैम करवाने के लिए मजबूर किया जाता है। मिंग जैसे गैंग अब भारतीयों को भी निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वे अंग्रेजी और हिंदी बोलने वालों को भारतीय बाजार में ठगी के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं।