jhankar
ब्रेकिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आएंगे,चीन ने की पुष्टि  BRICS समिट के लिए भारत आ रहे कई... स्कूल बस में आग लगाने के मामले में नाम घसीटने का आरोप, पालकों व सामाजिक लोगों के साथ ASP को सौंपा ज्... गुरुवार, 10 सितंबर 2026 के मुख्य समाचार की एक झलक हरदा: 4 वर्षीय छात्रा शिवांगी जाट की मौत के मामले में स्कूल वैन चालक और मालिक पर केस दर्ज, वैन जब्त 10 सितंबर 2026 का सुविचार कल जो हुआ उसे भूलकर, आज एक नई शुरुआत करो गणेश महोत्सव पर डीजे की तेज आवाज पर प्रशासन सख्त, नियम तोड़ा तो मशीनें होंगी जब्त संभाग स्तरीय स्पर्धा में बैतूल व नर्मदापुरम फुटबॉल चैंपियन, शतरंज में 5 खिलाड़ी राज्य स्तर के लिए चय... सितंबर में 9 दिन बैंकिंग सेवाएं रहेंगी प्रभावित, 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल तेलंगाना- हैदराबाद-बेंगलुरु हाईवे पर दर्दनाक हादसा देवास: रात में खरीदे 250 ग्राम मलाई के लड्डू, सुबह फ्रिज से निकाले तो आने लगी बदबू

इंदौर नगर निगम एमआईसी मेंबर मनीष मामा ने कर्मचारी को रिश्वत लेते पकड़ा

इंदौर। स्वच्छता में सात बार नंबर वन रहे इंदौर नगर निगम की साख पर खुद उसके कर्मचारियों ने बट्टा लगा दिया है। निगम मुख्यालय में एक महिला से उसकी आईडी रिकवर करने के बदले ₹400 की रिश्वत ली गई। भ्रष्टाचार का आलम यह रहा कि कर्मचारी ने यह राशि नकद के बजाय ऑनलाइन (पेटीएम) ट्रांसफर करवाई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है।

​एमआईसी सदस्य ने पकड़ी चोरी

​मामले का खुलासा तब हुआ जब एमआईसी सदस्य मनीष शर्मा (मामा) पीड़ित महिला को लेकर खुद निगम मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों के सामने इस भ्रष्टाचार पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। एक जनप्रतिनिधि का इस तरह पीड़ित के साथ मोर्चा संभालना निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली और निचले स्तर के कर्मचारियों पर अफसरों के ढीले नियंत्रण की पोल खोलता है।

- Install Android App -

​डिजिटल भ्रष्टाचार का ‘नया मॉडल’

​डिजिटल इंडिया के इस दौर में निगम के गलियारों में भ्रष्टाचार का भी ‘डिजिटल मॉडल’ सामने आया है। आईडी सुधारने जैसे मामूली काम के लिए मजबूर महिला को परेशान किया गया और फिर साक्ष्य मिटाने या पकड़े जाने के डर से ऑनलाइन भुगतान लिया गया। घटना के बाद अब निगम कमिश्नर की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

​सवालों के घेरे में सिस्टम

​वीडियो वायरल होने के बाद शहर में चर्चा है कि क्या केवल निलंबन की कागजी कार्रवाई होगी या भ्रष्ट कर्मचारियों पर ठोस कानूनी एक्शन लिया जाएगा? लोगों का कहना है कि यदि निगम के भीतर बैठे इन ‘रिश्वतखोरों’ पर लगाम नहीं कसी गई, तो स्वच्छता की रैंकिंग सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।