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CM मोहन यादव ने किया होलिका दहन, प्रदेश में सबसे पहले महाकाल को गुलाल लगाकर किया गया शुरू

उज्जैन। देशभर में आज होलिका दहन किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में भी होलिका दहन शुरू किया जा चुका है। सबसे पहले उज्जैन में बाबा महाकाल को गुलाल लगाकर शुरू किया गया। वहीं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सीएम आवास पर मंत्रोच्चान के साथ पत्नी संग होलिका दहन और पूजापाठ किया।

भोपाल में 1500 से ज्यादा जगहों पर होलिका दहन

मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में होलिका दहन किया जा रहा है। केवल राजधानी भोपाल में ही 1500 से ज्यादा जगहों पर होलिका दहन किया जा रहा है। नए और पुराने शहर में जगह-जगह पर होलिका दहन कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। शुभ मुहूर्त के अनुसार होलिका दहन किया जा रहा है।

गाय के गोबर के 25 हजार कंडों से बनाई गई होलिका

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ग्वालियर में ग्वालियर-चंबल अंचल की सबसे बड़ी होलिका ग्वालियर में बनाई गई है। सर्राफा बाजार में गाय के गोबर के 25 हजार कंडों से होलिका बनाई गई थी। जिसे रात 9 बजे दहन किया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि लकड़ी की होलिका दहन करने पर प्रदूषण होता है। बड़ी मात्रा में लकड़ियां इकट्ठी करनी पड़ती हैं। जिसके कारण पेड़ों की कटाई करनी पड़ती है। इससे बचने के लिए कंडों की होली बनाई जाती है। लगभग 70 सालों से सर्राफा बाजार में व्यापारी मिलकर इस तरह से होलिका दहन कर रहे हैं।

जबलपुर में होलिका दहन की प्रतिमा बनीं चर्चा का विषय

जबलपुर में भी धूमधाम से होलिका दहन किया जा रहा है। लगभग 1500 जगहों पर होलिका दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। यहां होलिका की प्रतिमा भी जलाई जा रही हैं। जबलपुर के मुख्य चौक चौराहा पर इस बार होलिका की प्रतिमा चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इनमें दो तरीके की तरह प्रतिमा हैं। होलिका की कुछ प्रतिमा इतनी सुंदर हैं कि लोग इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ प्रतिमा इतनी डरावनी हैं कि उन्हें देखकर डर लगरहा है।

मल्हारराव के काल से आरंभ हुई गौरवशाली शुरुआत
इंदौर के राजसी इतिहास में होलिका दहन की यह परंपरा विशेष महत्व रखती है। माना जाता है कि मल्हारराव होलकर के शासनकाल (1728-1766) में राजवाड़ा के मुख्य द्वार के सामने गोधूलि वेला में होलिका दहन की शुरुआत हुई थी। उस दौर में यह आयोजन राजसी गरिमा और अनुशासन के साथ संपन्न होता था। देशभर के राजमहलों और रियासतों में होली उत्सव की परंपरा रही है, लेकिन इंदौर का राजवाड़ा अपने ऐतिहासिक निरंतरता के कारण विशेष पहचान रखता है।