मिडिल ईस्ट में भारी तनाव: ईरान का कुवैत की तेल रिफाइनरी पर भीषण ड्रोन हमला
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 नई दिल्ली/कुवैत सिटी । मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती बयानबाजी और सैन्य कार्रवाई के बीच, ईरान ने कुवैत की प्रमुख *मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी* को निशाना बनाया है। शुक्रवार सुबह हुए इस ड्रोन हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है।
रिफाइनरी में भीषण आग, आपातकालीन स्थिति घोषित
कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (KPC) के अनुसार, शुक्रवार तड़के रिफाइनरी पर कई ड्रोन दागे गए। इस हमले के तुरंत बाद रिफाइनरी की महत्वपूर्ण परिचालन इकाइयों (Operational Units) में भीषण आग लग गई। आसमान में धुएं का काला गुबार देखा गया, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिए। फिलहाल फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी रिस्पांस टीमें आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं।
ट्रंप की धमकी और अमेरिका-ईरान टकराव का असर
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें आई थीं। डोनाल्ड ट्रंप की नई चेतावनियों और अमेरिका द्वारा ईरान के एक प्रमुख पुल पर की गई कार्रवाई के बाद तेहरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने पहले ही खाड़ी देशों के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी, और कुवैत पर हुआ यह हमला उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट के बादल
मीना अल-अहमदी रिफाइनरी कुवैत के सबसे बड़े तेल प्रसंस्करण केंद्रों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले से न केवल कुवैत के स्थानीय उत्पादन को चोट पहुँचेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति श्रृंखला (Global Oil Supply Chain) भी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। यदि आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया और रिफाइनरी लंबे समय तक बंद रही, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
खाड़ी देशों में बढ़ता डर
ईरान के इस कदम ने पड़ोसी खाड़ी देशों की चिंता बढ़ा दी है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपने ऊपर होने वाले किसी भी हमले का जवाब क्षेत्र के महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्रों पर हमला करके देगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात पर नजर टिकाए हुए है कि अमेरिका और उसके सहयोगी इस उकसावे वाली कार्रवाई पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

