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दस्तावेजों का दुरुपयोग- जितेंद्र का पैन कार्ड करीब 2 साल पहले कहीं गुम हो गया था। आशंका जताई जा रही है कि जालसाजों ने इसी खोए हुए पैन कार्ड का इस्तेमाल कर फर्जी फर्म खड़ी की।

जीएसटी और फर्जीवाड़ा- जितेंद्र के वकील राकेश ठाडा के अनुसार, किसी ने न केवल पैन कार्ड का इस्तेमाल किया, बल्कि उनके नाम पर फर्जी जीएसटी नंबर भी जारी करवा लिया।

हीरे-जवाहरात का खेल- नोटिस में जिक्र है कि यह सारा लेनदेन हीरे-जवाहरात (Diamonds) के कारोबार से जुड़ा है। इसमें पाली के एक डायमंड कारोबारी की संलिप्तता का भी अंदेशा जताया जा रहा है।

बैंक मैनेजर से जवाब तलब: क्यों नहीं दी जानकारी ?

आयकर विभाग ने इस मामले में बैंक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। संबंधित बैंक के मैनेजर को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि आखिर एक साधारण प्रोफाइल वाले व्यक्ति के खाते से इतने बड़े स्तर पर करोड़ों का ट्रांजेक्शन होता रहा और बैंक ने इसकी रिपोर्ट ‘सस्पेक्टेड ट्रांजेक्शन’ के तहत क्यों नहीं की?

पुलिस जांच और पीड़ित की गुहार

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धोखाधड़ी का शिकार हुए जितेंद्र ने अब अजमेर के गंज थाना पुलिस में मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने जालसाजों के नेटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया है।

“मैंने कभी इतने पैसे देखे तक नहीं, करोड़ों की बात तो दूर है। इस नोटिस ने मेरी नींद उड़ा दी है और डर के मारे मैंने खाना-पीना छोड़ दिया है।” — जितेंद्र बाड़ोलिया (पीड़ित)

सावधानी बरतने की अपील

यह घटना देश में बढ़ते डिजिटल और दस्तावेज धोखाधड़ी का एक बड़ा उदाहरण है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपका पैन कार्ड, आधार कार्ड या कोई भी पहचान पत्र खो जाता है, तो तुरंत उसकी एफआईआर दर्ज करानी चाहिए और संबंधित विभागों को सूचित करना चाहिए, ताकि आपके दस्तावेजों का कोई गलत इस्तेमाल न कर सके।

फिलहाल, पुलिस और आयकर विभाग मिलकर उस गिरोह की तलाश कर रहे हैं जिसने एक गरीब शख्स को मोहरा बनाकर करोड़ों का काला धन इधर-उधर किया है।