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हरदा में खाद संकट गहराया: सरकार के सभी दावे फेल, किसानों को नहीं मिल रही यूरिया – मोहन सांई

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से की मुलाकात, ई-टोकन व्यवस्था बंद कर तत्काल यूरिया उपलब्ध कराने की मांग

हरदा। जिले में यूरिया खाद की किल्लत को लेकर किसानों की बढ़ती परेशानी के बीच जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहन सांई ने सरकार और जिला प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि “सरकार के सारे दावे फेल साबित हो गए हैं। एक माह पहले जिला प्रशासन पर्याप्त खाद भंडारण का दावा कर अपनी पीठ थपथपा रहा था, लेकिन आज हजारों किसान यूरिया के लिए दुकानों और डीएमओ गोदाम के चक्कर काटने को मजबूर हैं।”

मोहन सांई कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ कलेक्टर से मिले और बताया कि कृषि विभाग के अनुसार जिले में 70 से 80 हजार हेक्टेयर में मक्का की बोनी हो चुकी है। बोनी के लगभग 25 दिन बाद किसानों को अब यूरिया की आवश्यकता है, लेकिन उन्हें खाद उपलब्ध नहीं हो रही है।

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उन्होंने आरोप लगाया कि ई-टोकन प्रणाली में फॉस्फेटिक खाद का उठाव किए बिना यूरिया नहीं दिया जा रहा, जबकि फॉस्फेटिक खाद की जरूरत केवल बोनी के समय होती है। अब किसानों को सिर्फ यूरिया चाहिए। उन्होंने कहा कि फॉस्फेटिक खाद की कीमत 2,150 से 2,450 रुपये प्रति बोरी है, जिसे खरीदना आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों के लिए संभव नहीं है।

मोहन सांई ने कहा कि सरकार ने न तो किसानों का पूरा गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदा और न ही अभी तक मूंग खरीदी शुरू हुई है। ऐसे में किसान आर्थिक तंगी से गुजर रहा है।

कांग्रेस ने मांग की कि किसानों को बिना किसी बाधा के पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराया जाए, ई-टोकन व्यवस्था समाप्त की जाए तथा आगामी रबी सीजन के लिए डीएपी और यूरिया का पर्याप्त अग्रिम भंडारण सुनिश्चित किया जाए।

कलेक्टर से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में जिला संगठन महासचिव गोविंद सूरमा, रामदास तोमर, विक्रम चौहान और हरिसिंह राजपूत भी शामिल रहे।